कठिन होगी आप के लिए लोकसभा की लड़ाई

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Thursday, March 06, 2014-1:18 AM
नई दिल्ली(निहाल सिंह): विधानसभा चुनाव में दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी आम आदमी पार्टी (आप) के लिए लोकसभा की लड़ाई आसान नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से पिछले कुछ महीनों में पार्टी को अपने ही लोगों की वजह से किरकिरी झेलनी पड़ी तो वहीं अब टिकट बंटवारे को लेकर हुई पार्टी के अंदर की बगावत पार्टी को मंहगी पड़ सकती है।
 
माना जा रहा है कि पहले सोमनाथ भारती के मामले को लेकर दिल्ली के लोग केजरीवाल से नाराज दिखे तो वहीं दिल्ली से खास आदमी को टिकट देने पर पार्टी के अंदर रस्साकसी भी बहुत तेजी से हो रही है। जिसका सीधा असर लोकसभा चुनाव के नतीजों पर पड़ गया तो पार्टी जहां 7-0 से क्लीन स्वीप करने का जो सपना देख रही है वह टूट जाएगा। 
 
सुर हुए अलग: दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जीत का सबसे अहम हिस्सा सभी कार्यकत्र्ताओं का एक सुर में काम करना माना गया था क्योंकि जिस निष्ठा व लगन से आप के कार्यकत्र्ताओं और नेताओं ने दिल्ली के घर-घर जाकर प्रचार किया तो दिल्ली वालों ने भी अपने घर से निकल कर आप को वोट दिया लेकिन दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से बनी सरकार के बाद केजरीवाल और उनके लोग विवादों में घिरते रहे। तो वहीं केजरीवाल को अपने ही घर में बागियों का सामना करना पड़ा।
 
लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने बगावत करते हुए केजरीवाल पर तानाशाही के आरोप लगाए तो वहीं इसके बाद देशभर में कई लोग केजरीवाल का विरोध करने लगे। अपने ही घर में हुआ केजरीवाल का विरोध केजरीवाल के लिए दिल्ली में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 
 
गांव देहात में पकड़ बनाना होगी चुनौती : दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को सबसे अधिक सीटें नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं में मिली लेकिन सबसे कम सीटें पार्टी को उत्तर- पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट की विधानसभा में मिलीं। यहां पार्टी को 10 में से केवल 2 सीटों पर विजय हासिल हुई। इसको देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि पार्टी को गांव देहात के क्षेत्रों में पकड़ बनाने के लिए काम करना होगा क्योंकि दिल्ली की उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट को गांव-देहात से जोड़कर देखा जाता है। 
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