अमरनाथ यात्रा: भंडारा संचालकों पर शर्तों की बौछार

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Saturday, March 08, 2014-11:38 AM

जम्मू: श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने आगामी अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर भंडारा संचालकों पर नियमों एवं शर्तों की बौछार कर दी है। भंडारा संगठनों सबलो के अध्यक्ष विजय ठाकुर एवं महासचिव राजन गुप्ता और सायबो के अध्यक्ष राजन कपूर सोनू एवं विजय प्रभाकर के साथ चली कई दौर की बातचीत के बावजूद भंडारा संस्थाओं के प्रति श्राइन बोर्ड के रुख में कोई खास नरमी नहीं आई है।

बोर्ड द्वारा निर्धारित किए गए नियमों एवं शर्तों की फेहरिस्त काफी लम्बी है और ‘गंभीर’ शर्तों का उल्लंघन करने पर भंडारा संस्था की 10,000 रुपए सिक्योरिटी राशि जब्त होने के अलावा हर उल्लंघन पर 5000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

यदि कोई संस्था अपनी गलतियों को दोहराती है तो हर उल्लंघन का जुर्माना बढ़ कर 20,000 रुपए तक पहुंच सकता है और संबंधित संस्था पर 3 वर्ष तक ब्लैक लिस्ट किए जाने की तलवार लटक सकती है। श्राइन बोर्ड द्वारा यात्रा क्षेत्र में शिव भक्तों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करवाने के लिए लगाए जाने वाले भंडारों की संख्या पहले ही कम कर दी गई है।

नए नियमों के अनुसार अब कोई भी संस्था एक से ज्यादा भंडारा नहीं लगा सकेगी। भंडारा लगाने वाली संस्थाओं के लिए सेवादारों की अधिकतम संख्या 50 निर्धारित की गई है और ये सभी सेवादार केवल निर्धारित वर्दी में एवं पहचान पत्र के साथ ही अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

भंडारा संस्थाओं को अपने तमाम सेवादारों का 1-1 लाख रुपए का बीमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं जिसका खर्च संबंधित संस्था को ही वहन करना होगा। दोमेल एवं चंदनवाड़ी से आगे पवित्र गुफा तक भंडारा लगाने वाली संस्थाओं को यात्रा शुरू होने से 15 दिन पहले अपने सेवादारों के साथ भंडारा स्थल पर पहुंचना होगा, जबकि दोमेल एवं चंदनवाड़ी तक के रास्ते में भंडारा लगाने वाली संस्थाएं 10 दिन पहले भंडारा स्थल तक पहुंच सकती हैं।

यदि कोई संस्था किसी कारणवश यात्रा सम्पन्न होने से पहले अपना भंडारा समेटकर वापसी करना चाहती है तो संबंधित संस्था के अध्यक्ष को बोर्ड के शिविर निदेशक से व्यक्तिगत तौर पर मिल कर लिखित अपील करनी होगी और जितने दिन पहले भंडारा बंद किया है उसके 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बोर्ड के पास हर्जाने का डीमांड ड्राफ्ट जमा करवाना होगा, तब भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही वह संस्था अपना भंडारा बंद कर सकेगी।

अन्य संस्थाओं को भी भंडारा स्थल छोडऩे से पहले शिविर निदेशक से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी से लिखित मंजूरी लिए बिना कोई भी संस्था अपने भंडारे में यात्रियों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान नहीं कर सकेगी। किसी भी भंडारा संस्था को किसी यात्री से दान राशि और भंडारे में बने अस्थायी मंदिर में चढ़ावा स्वीकार करने की अनुमति नहीं होगी। 

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