न मांगा पैसा,न लिया,फिर कैसे बनाया भ्रष्टाचार का मामला

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Wednesday, March 12, 2014-12:12 AM

 नई दिल्ली (मनीषा खत्री): जब अभियोजन पक्ष पैसा मांगने या पैसा लेने के आरोप को साबित ही नहीं कर पाया तो, फिर  कैसे निचली अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी करार दे दिया। 

यह टिप्पणी करते हुए लगभग 19 साल पुराने मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए उनको बरी कर दिया है। इन्हीं के एक साथ अदालत ने एक अन्य आरोपी को भी बरी किया है। 

न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर की खंडपीठ ने तत्कालीन एस.आई इंद्र सिंह बिष्ठ,ए.एस.आई. बलराम दहिया व राजेंद्र प्रसाद, हेड कांस्टेबल नमो नारायण मीणा, बलबीर सिंह व तेज सिह और कांस्टेबल राजेंद्र प्रसाद को बरी कर दिया है। इन सभी को निचली अदालत ने एक-एक साल कैद व 15-15 100 रुपए जुर्माने की सजा दी थी। इन्हीं के साथ खंडपीठ ने एक अन्य व्यक्ति रमींद्र सिंह को भी बरी कर दिया है। उसे 6 महीने व एक हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई थी। 
 
न्यायालय ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि न तो पैसा मांगने या लेने की बात साबित हो पाई और न ही यह साबित हुआ कि उन्होंने शिकायकत्र्ता के ड्राइवर को कोई मासिक कार्ड लेने के लिए कहा था। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि निचली अदालत ने कैसे बिना दिमाग लगाए आरोपियों पर आरोप तय कर दिए। ऐसे में साफ है कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ अपना आरोप साबित नहीं कर पाया, इसलिए सभी को बरी किया जाता है।
 
निचली अदालत ने 30 नवम्बर 2007 को इस मामले में कुल 8 पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए सजा दी थी, जबकि एक अन्य दलाल रमींद्र सिंह को सजा दी गई थी, जबकि तीन दलाल को बरी कर दिया था। इसी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। 
 
इस मामले में घटना 28 नवम्बर 1994 की है। सभी आरोपी पुलिसकर्मी उस समय दिल्ली ट्रांसपोर्ट अॅथारिटी में इंफोर्समैंट स्टॉफ में तैनात थे। घटना वाले दिन मैसर्स  भंडारी इंटरस्टेट कैरियर का एक ट्रक मद्रास से सामान लेकर दिल्ली आया था। इसी ट्रक को रिंग रोड, पंजाबी बाग के पास चैकिंग के लिए रोक लिया गया था और उसके कागजात जब्त कर लिए थे। 
 
इस संबंध में कुछ दिन बाद एक अखबार में खबर छपी की मासिक वसूली के लिए पुलिसवालों ने एक ट्रक के गलत तरीके से कागजात जब्त कर लिए, जिसके बाद टं्रासपोर्ट के  डिप्टी डायरैक्टर ने जांच के आदेश दे दिए। वहीं शिकायकत्र्ता कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिसके बाद हुई जांच की रिपोर्ट के बाद यह मामला सब्जी मंडी थाने में दर्ज किया गया था।
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