होली खेंले पर जरा संभल के....

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Sunday, March 16, 2014-3:14 PM

जालंधर: कहीं स्वांग से परिपूर्ण फिल्मों की होली, कहीं वीरता दर्शाता होला-मोहल्ला, कहीं ब्रज की चंचल चुलबुली लट्ठमार होली तो कहीं बुराई पर अच्छाई का परचम फहराती दहकती होली और कहीं अठखेलियां करती रंग भरी होली। अगर होली रंगों का त्यौहार है तो क्यों न हम सर्वत्र खुशियों और सौहार्दता के रंग बिखेरें, क्षमतानुसार किसी बेरंग जीवन में भी कोई रंग भर दें। रंगों से खेलना किसे पंसद नहीं होता। रंग लगाना और लगवाना सभी चाहते हैं। लेकिन होली खेलने से पहले और होली खेलने के बाद कुछ बातों का अगर ध्यान रखा जाए तो होली और भी सुनहरी और मजेदार हो जाएगी।

होली खेलने से पहले रखे इन बातों का ध्यान
अगर होली के लिए दोस्तों के संग निकलना है तो ढीले परंतु सूती कपड़े पहनने चाहिएं ताकि आपकी बॉडी काफी हद तक रंगों से बची रहे। इस बात का ध्यान रखें कि आपकी ड्रैस पारदर्शी न हो नहीं तो पानी वाले रंगों से खेलने पर आप अनकम्फर्टेबल महसूस करेंगी।

स्किन केयर
होली खेलने के बाद ही स्किन केयर का काम शुरू नहीं होता बल्कि रंग खेलने से पहले ही स्किन केयर शुरू करें।

-होली खेलने से पहले चेहरे पर क्रीम या वाटर प्रूफ बेस लगाएं तथा बॉडी पर ऑलिव ऑयल, तिल का तेल या सरसों का तेल लगाएं। इस प्रकार आपके चेहरे एवं बॉडी पर रंग नहीं चढ़ेगा तथा नहाने पर आसानी से उतर जाएगा।
-होंठों पर लिपगार्ड लगाने के पश्चात अच्छी क्वालिटी की लौंग स्टे लिपस्टिक जरूर लगाएं। इससे होंठों पर रंगों का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
-बालों में तेल या जैल लगा कर उनका जूड़़ा बांध लें ताकि बालों और स्कैल्प पर रंग की पकड़ ढीली रहे।
-अपने नाखूनों पर भी नेल पॉलिश अवश्य कर लें ताकि रंगों और पानी से वे खराब होने से बचें और होली खेलने के बाद भी आप अपनी पहली रंगत में रहें।

होली खेलने के बाद

होली का हुड़दंग खत्म होने के बाद जल्दी ही रंगों को साफ कर लें। नहाने के बाद रंग रगड़ कर न उतारें। इससे जहां त्वचा में जलन होगी, वहीं त्वचा के छिलने का डर भी बना रहेगा। रंग छुड़ाने के लिए घरेलू उपायों का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
-दो चम्मच चोकर, एक चम्मच चंदन पाऊडर, एक चम्मच चावल के आटे में थोड़ी-सी खसखस, कुछ बूंदें शहद और टमाटर का गूदा मिला कर स्क्रबर तैयार करें तथा इससे रंग छुड़ाएं। यही नहीं इससे त्वचा भी मुलायम एवं चमकदार होगी।
-नींबू के छिलके पर नमक और चीनी लगा कर चेहरे, गर्दन, हाथों और पैरों पर लगाएं। त्वचा की रंगत  निखर उठेगी।
-तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी में संतरे का रस मिला कर चेहरे पर लगा लें। त्वचा भी खिली-खिली नजर आएगी।
-दही में बेसन, संतरे के सूखे छिलकों का पाऊडर, थोड़ी सी हल्दी, नींबू तथा एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिला कर रंग लगी त्वचा पर लगाएं।
-जहां रंग लगा हो, वहां पपीते की फांक रगड़ कर रंग छुड़ाएं।
-बालों से रंग निकालने के लिए पहले उन्हें सादे पानी से धोकर रंग निकालें फिर शैम्पू और कंडीशनिंग कर लें।

रंग छुड़ाने में हो जलन तो....
-रंग छुड़ाने में यदि त्वचा में जलन होने लगे तो दो चम्मच केओलिन पाऊडर में कुछ बूंदें शहद और गुलाब जल मिला कर पेस्ट बना लें, इसे चेहरे पर लगा लें तथा सूख जाने पर पानी से धोकर मॉयश्चराइजर लगा लें।
-जलन से छुटकारा पाने के लिए आप शरीर पर मात्र मुल्तानी मिट्टी का लेप भी लगा सकती हैं।
-ग्लिसरीन और गुलाब जल का लेप लगाने से चेहरे की जलन से छुटकारा पाया जा सकता है।

ऐसे खेंले होली

इको फ्रैंडली होली: बाजार में उपलब्ध घातक रसायनों एवं धातुओं से मिश्रित सिंथैटिक रंगों की अपेक्षा यदि हम सूखे हर्बल रंगों से होली खेलेंगे तो हमारी त्वचा और स्वास्थ्य को भी कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा और यह ईको फ्रैंडली भी होंगे। पहले समय में लोग गुलाब, केवड़ा, पलाश, अमलतास, गुड़हल, मेहंदी आदि फूल-पत्तियों द्वारा निर्मित रंगों का ही प्रयोग करते थे।
 
तिलक होली : हमारे देश में कोई भी पुण्य कर्म करते समय माथे पर तिलक लगाने की प्राचीन परम्परा है।  आज भी बहुत से लोग खासकर बूढ़े-बुजुर्ग होली पर एक-दूसरे को तिलक लगाने को ही अधिमान देते हैं जिससे त्यौहार की गरिमा के साथ-साथ संस्कृति भी कायम रहे।

फूलों की होली: रंगों के अतिरिक्त रंग-बिरंगे फूलों की पंखुडिय़ों से भी होली खेलने का प्रचलन है। नि:संदेह यह भी एक अच्छा विकल्प है। इस तरह की होली में भक्ति का रंग भी देखने को मिलता है। खासकर बृज और बरसाने की होली। यह आनंद से भरी होलीसब को भाव-विभोर कर देने में सक्षम है।

सभ्य होली : भद्र और सौम्य ढंग से होली मनाने पर अलग ही निखार आता है। जहां किसी भी प्रकार का नशा या भांग आदि विवाद उत्पन्न कर होली का मजा किरकिरा कर सकते हैं। गाली-गलौच, अंडे-कीचड़ फैंकना, कालिख मलना, अशिष्ट व्यवहार आदि फूहड़ता की निशानी है। वहीं घर के बने रंग-बिरंगे पकवान और आपका अपनापन इसका मजा दोगुना कर देते हैं। खाने-खिलाने के साथ नाच-गाकर भी शिष्टता और शालीनता से होली मनाई जा सकती है।

रंगों में मिलावट
क्या आप जानते हैं कि काला रंग बनाने के लिए लैड ऑक्साइड का प्रयोग किया जाता है जिससे किडनी फेल होने का खतरा होता है। हरा रंग जो कॉपर सल्फेट से बनता है, उससे आंखों में एलर्जी एवं सूजन हो सकती है तथा टैंपरेरी अंधापन तक आ सकता है। मरक्यूरी सल्फाइट से बनता है लाल रंग। यह कैमिकल इतना जहरीला होता है कि इससे स्किन कैंसर तक हो सकता है।

यही नहीं, गुलाल कोलोरैंट सिलिका या फिर ऐस्बैस्टस से मिल कर बनता है और इससे स्वास्थ्य को इस कद्र नुक्सान पहुंचता है कि अस्थमा और स्किन डिकाीका तक हो सकती है। इसलिए होली खेलने के लिए रंग घर पर ही बनाएं। ये न तो आपकी स्किन को नुक्सान पहुंचाते हैं और न ही पर्यावरण को।

घर में बनाएं हर्बल रंग
-पीले रंग का गुलाल चाहिए तो दो चम्मच पिसी हल्दी में थोड़ा-सा मैदा मिलाएं तथा उसे मिक्सी में डाल कर पानी मिलाते हुए पेस्ट बना लें। कुदरती रंग ही नहीं, यह बाद में स्क्रबर का काम करेगा जब आप इसे त्वचा से उतारेंगी।
-पानी में थोड़ी-सी हल्दी मिला कर उबाल लें तथा पिचकारी में भर कर खेलें।
-चुकंदर को पानी में उबालेंगी तो मेजैंटा रंग तैयार हो जाएगा।
-अनार के छिलकों को पानी में डाल कर उबालने से लाल रंग तैयार हो जाएगा। यदि खुशबू चाहिए तो आप उसमें लाल चंदन का पाऊडर भी मिला सकती हैं।


इन रंगों से रहे सावधान
हरा रंग
हरा रंग कॉपर सल्फेट से, परपल क्रोमियम आयोडाइड से , सिल्वर एलुमीनियम ब्रोमाइड से और काला रंग लेड ऑक्साइड को मिलाकर तैयार किया जाता है। इन रंगों को चमकदार बनाने के लिए अक्सर उनमें कांच का बुरादा मिलाया जाता है। वहीं हरे रंग में मौजूद कॉपर सल्फेट अगर आंखों में चला जाए तो यह आंखों में एलर्जी और अस्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है।
काला रंग
काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड रेनल फेल्योर यानी किडनी खराब होने का कारण बन सकता है। यह व्यक्ति की सीखने की क्षमता को भी समाप्त कर सकता है।
 बैंगनी रंग
बाजार में बिकने वाले बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है जो ब्रोंकियल अस्थमा और एलर्जी पैदा कर सकता है।
सिल्वररंग
सिल्वर कलर बनाने में एलुमीनियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल करते हैं जो कार्सिनोजेनिक हो सकता है , यानी यह कैंसर तक पैदा कर सकता है। जबकि लाल रंग में इस्तेमाल होने वाला मर्करी सल्फाइट स्किन कैंसर का कारण तक हो सकता है।
गुलाल के खतरे भी कम नहीं
गुलाल में एल्युमीनियम ब्रोमाइड मिलाया जाता है जो कैंसर पैदा कर सकता है। नीले गुलाल में परशियन ब्लू होता है जो स्कीन में एलर्जी और इन्फेक्शन पैदा कर सकता है। रेड गुलाल के लिए यूज किया जाने वाला मरकरी सल्फाइट इतना पॉजनेटिक होता है कि इससे स्किन का कैंसर हो सकता है।

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