विधायकों की बल्ले-बल्ले, पार्षद रह गए थल्ले-थल्ले

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Sunday, March 16, 2014-10:37 PM

नई दिल्ली, (सतेन्द्र त्रिपाठी): भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार ना-ना करते-करते तीन विधायकों पर दांव खेल दिया। विधायकों के लिए तो लोकसभा के दरवाजे खोल दिए, लेकिन पार्षद बेचारे फिर से मुंह ताकते रह गए। 

करीब दर्जनभर पार्षद भी टिकट के लिए जी-जान एक किए हुए थे। दो पार्षद तो आखिरी दौर तक उम्मीद लगाई रही कि वह मैदान मार ले जाएंगी, लेकिन इस बार एक ही महिला को टिकट देकर पार्टी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। टिकट दौड़ में पीछे रह जाने से पार्षदों के तो चेहरे का रंग ही उतर गया। पार्टी ने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनावों में पार्षदों को आजमाया जा सकता है।

सबसे ज्यादा चार पार्षद उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से टिकट मांग रहे थे। इनमें पूर्वी दिल्ली के महापौर रामचरण दूबे, पूर्व मेयर डॉ.अन्नपूर्णा मिश्रा, सत्या शर्मा व महक सिंह शामिल है। मुस्लिम वोटों वाली सीट से दो बार जीतने वाली सत्या शर्मा का नाम तो इस सीट पर पडऩे वाले दोनों जिलों से भेजा गया था। उन्हें भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी गुट का करीबी माना जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी ने यहां से बाहरी उम्मीदवार मनोज तिवारी को उतार दिया।

चांदनी चौक सीट से पार्षद रेखा गुप्ता दावेदारी कर रही थी। वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी में होने के साथ-साथ उत्तरी दिल्ली नगर निगम में स्थायी समिति की उपाध्यक्ष है। पार्टी में उनकी पकड़ भी अच्छी बताई जाती है। इस सीट पर 26 फीसदी से अधिक वैश्य समुदाय के लोगों के होने की वजह से वह दावेदारी कर रही थी। मगर पार्टी ने विधायक हर्षवर्धन को उतार दिया।

नई दिल्ली सीट से दक्षिणी दिल्ली निगर निगम की पूर्व मेयर पार्षद सविता गुप्ता की दावेदारी थी। मेयर रहने के दौरान उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से वर्तमान मेयर सरिता चौधरी की जबरदस्त दावेदारी थी। उनका नाम केन्द्रीय चुनाव समिति में आखिरी दौर तक चला, लेकिन आखिरी दौर में पार्टी ने विधायक रमेश बिधूड़ी को टिकट सौंप दिया।

पश्चिम दिल्ली सीट से तमाम बड़े नामों के मैदान से हट जाने के कारण पार्षद आशीष सूद को लग रहा था कि उनका मौका लग सकता है। लेकिन यहां भी विधायक प्रवेश वर्मा रंग चढ़ता नजर आया। अब प्रवेश लोकसभा के लिए ताल ठोकेंगे। पहले विधायक की टिकट की दौड़ में लगे रहे पार्षद यौगेन्द्र चंदौलिया उत्तर पश्चिम दिल्ली की सुरक्षित सीट से लोकसभा में जाने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन पार्टी ने यहां से दलित नेता उदित राज पर भरोसा जताया।
 

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