आजादी के लिए ईश्वर से अधिक खुद पर भरोसा रखते थे भगत सिंह

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Saturday, March 22, 2014-2:02 PM

लखनऊ: सत्ता के लिए देश को जाति और धर्म के नाम पर बांटने वाले राजनेताओं के उलट स्वतन्त्रता संग्राम के महान नायक शहीदे आजम भगत सिंह ने आजादी के लिए ईश्वर का भी सहारा लेने से परहेज कर लिया था और इसके लिए वह स्वंय को नास्तिक कहे जाने से तनिक भी विचलित नहीं होते थे। 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे को बुलंद करने वाले भगत सिंह को उनके क्रांतिकारी साथी सुखदेव और राजगुरू  के साथ लाहौर जेल में 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटका दिया गया था। अपने जेल प्रवास के दौरान शहीदे आजम ने अपनी डायरी में ईश्वर के प्रति अपने बेबाक विचार प्रकट किए थे।
 
भगत सिंह का मानना था कि देश की आजादी सिर्फ अपने बूते हासिल की जा सकती है और इसके लिए ईश्वर का सहारा लेना बेमानी है। शहीदे आजम के अनुसार ईश्वर की मौजूदगी का अहसास व्यक्ति को कमजोर बनाता है। 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार ‘द पीपल्स’ में डायरी के अंश प्रकाशित किए गए थे।

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