बिहार में इंडियन मुजाहिद्दीन से ज्यादा हावी है सिमी

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Thursday, March 27, 2014-1:24 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र/ महेश चौहान/ कृष्ण कुणाल सिंह): पुलिस और खुफिया एजैंसियों के लिए हाल ही में हॉट स्पॉट बने बिहार में सिमी (स्टूडैंट ऑफ इस्लामिक मुवमैंट ऑफ इंडिया) का वर्चस्व है। सिमी के स्लीपर सैल यहां आतंकियों की जमकर मदद करते हैं। इंडियन मुजाहिद्दीन की मदद भी यहां सिमी के लोग ही कर रहे थे। सिमी के लोगों को यहां सीधे रूप में आई.एस.आई. से भी आदेश आते हैं।

दिल्ली पुलिस के एक आला अधिकारी की मानें तो आई.एस.आई. द्वारा हवाला के जरिए भेजी गई सबसे ज्यादा रकम भी इसी राज्य में आती है। इसका एक कारण यह भी है कि यहां हवाला की रकम और विस्फोटक वाया बंगलादेश और नेपाल से होकर आसानी से आ जाता है। आंतकी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू ने पूछताछ में बताया है कि 27 अक्तूबर को मोदी की पटना रैली में बम बलास्ट आई.एम. ने नहीं बल्कि सिमी ने करवाया था। हालांकि आई.एम. के लोगों को भी इन गतिविधियों के बारे में सारी जानकारी थी।

 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि ब्लैक ब्यूटी (सिमी)का बिहार-झारखंड में मुखिया हैदर अली है। हैदर अली से तहसीन अख्तर की मुलाकात नवम्बर 2011 में हुई थी। उन दोनों की पहली मुलाकात दरभंगा फिर पटना में हुई। उसके बाद हैदर के कहने पर वह रांची चला गया था। वहां पर उसे हैदर ने ही हिनू चौक स्थित किराए पर एक मकान दिलाया था। उस दौरान वह इम्तियाज के साथ भी वहां रहा। उस वक्त उसके सिमी के कई सदस्यों से उसकी मुलाकात हुई।

 

उसने पुलिस को बताया कि बिहार में सिमी के सदस्य काफी सक्रिय हैं और आई.एम. व आई.एस.आई. के आका भी इनकी बात सुनते व मानते हैं। उसने बताया कि पटना में मोदी के रैली में जो बम बलास्ट हुआ था, उसकी सारी योजना सिमी ने बनाई थी और रैली में बम भी सिमी के सदस्यों ने रखा था। हालांकि इस बात की जानकारी इंडियन मुजाहिद्दीन को थी लेकिन उस हमले में वह शामिल नहीं था। पूछताछ में पता चला कि पटना स्टेशन के बाहर जो बम बलास्ट हुआ था जिसमें मारा गया आंतकी इम्तियाज पहले सिमी का सदस्य था, बाद में वह भी आई.एम. के लिए काम करने लगा था।  

 

सिविल इंजीनियरिंग का छात्र रह चुका है तहसीन : पुलिस अधिकारी ने बताया कि इंडियन मुजाहिद्दीन का तत्कालीन मुखिया व गिरफ्तार आतंकी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू बिहार के मौलाना आजाद नैशनल मुस्लिम विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स कर चुका है। उसका जन्म दरभंगा स्थित दाल सराय गांव में हुआ था। उसने मनियारपुर में शुरूआती पढ़ाई की। मिडिल व हाईस्कूल की पढ़ाई उसने मुम्बई व गोवा से की। 2008 में उसने सी.बी.एस.ई. का कोर्स पास किया था। उसके बाद वह दोबारा वापस बिहार आ गया, उसके बाद यहां से सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स किया।


जेहाद व इस्लाम में रुचि ने बनाया आंतकी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में पता चला कि उसे बचपन से ही जेहाद व इस्लाम के बारे में जानने की बहुत ज्यादा ललक व रुचि थी। यही कारण है कि स्कूल के दिनों से ही वह इस्लाम व जेहाद के बारे में जानने के लिए कई मौलवी से सम्पर्क रखता था। वह जानना चाहता था कि आखिर जेहाद का मतलब क्या होता है। 2009-2010 में उसकी मुलाकात गयूर अहमद जमाली से हुई। उसने ही उसकी यासीन भटकल से मुलाकात करवाई थी। पहली बार यासीन भटकल मोनू से यूनानी डॉक्टर इमरान बनकर मिला था।

 

वह मोनू को अक्सर जेहाद से जुड़ी किताबें देता था और जेहाद के बारे में जानकारी देता था।जामा मस्जिद और वाराणसी में हुआ था विवाद : जामा मस्जिद गोली कांड में तहसीन अख्तर ने स्पैशल सैल को बताया है कि उसका इसमें कोई हाथ नहीं था लेकिन इसके पीछे की वजह सूत्र बताते हैं कि यासीन भटकल ने जब तहसीन को भारत में आई.एम. का चीफ बना दिया था उसके बाद से ही अब्दुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी उससे चिढऩे लगा था।

जामा मस्जिद कांड से पहले योजना बनने पर तहसीन चाहता था कि कुकर में आई.ई.डी. रखकर ज्यादा से ज्यादा नुक्सान किया जाए। जिस पर हड्डी को शक था क्योंकि अब्दुल्लाह इसमें कोई चांस लेना नहीं चाहता था। उन दोनों के झगड़े को यासिन ने ही सुलझाया था। इसके बाद 7 दिसम्बर, 2010 में वाराणसी में धमाके करने थे। बताया जाता है कि यहां पर 3 जगहों पर आई.ई.डी. से विस्फोट करने थे। इसमें ज्यादा से ज्यादा टूरिस्टों और लोकल लोगों को नुक्सान  पहुंचाना था लेकिन उनसे एक बम नहीं फटा था। इसके बाद एक बार फिर दोनों में इसको लेकर काफी झगड़ा हुआ था।

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