दिल्ली में कांग्रेस के समक्ष अपनी साख बचाने की चुनौती

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Sunday, March 30, 2014-12:34 AM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने से सकते में आई कांग्रेस के समक्ष लोकसभा चुनाव में अपनी साख को बचाने की बड़ी चुनौती है। कांग्रेस फिलहाल दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर काबिज है किंतु गत दिसम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में जिस तरह वह 43 से सिमटकर 8 सीटों पर आ गई, उसे देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस को लेकर बहुत ज्यादा आशान्वित नजर नहीं आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ-साथ पार्टी के कद्दावर नेता अशोक वालिया, योगानंद शास्त्री, राजकुमार चौहान, मुकेश शर्मा समेत कई अन्य मंत्री आम आदमी पार्टी (आप) की आंधी में उड़ गए थे। 

नई दिल्ली, पश्चिम दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली संसदीय सीटों के तहत प्रत्येक में आने वाली 10-10 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस एक पर भी विजयी नहीं हुई थी। कांग्रेस के नेता एक न्यूज चैनल के हालिया सर्वेक्षण को लेकर कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। इस सर्वेक्षण में आप के वोट प्रतिशत में जनवरी के मुकाबले अब काफी गिरावट आ रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ता नजर आ रहा है। इसको देखते हुए कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दिल्ली में लोकसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले होंगे।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की वजह से कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मुसलमान वोट बैंक के अपने पक्ष में आने की उम्मीद कर रही है जो विधानसभा चुनाव में काफी हद तक छिटक कर ‘आप’ के साथ नजर आया था। हालांकि कांग्रेस के जीते 8 विधायकों में 4 मुस्लिम हैं। पिछले चुनाव में पूर्वी दिल्ली से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित ने रिकार्ड 2 लाख 41 हजार 53 मतों से जीत हासिल की थी किंतु इस बार उन्हें यहां आप के राजमोहन गांधी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महेश गिरि से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान पूर्वी दिल्ली के लिए कई परियोजनाओं पर काम हुआ था और इस क्षेत्र का काफी नक्शा बदल गया है। इसके बावजूद इस बार दीक्षित की जीत उतनी आसान नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट पर जहां से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल दोबारा चुनाव मैदान में हैं, काफी उम्मीद लगाए हुए है। इस संसदीय सीट के तहत आने वाली 2 विधानसभा सीटें सीलमपुर और मुस्तफाबाद मुस्लिम बहुल हैं। अन्य सीटों पर भी इस समुदाय के मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। मुस्लिम बहुल सीट पर कांग्रेस के विधायक विजयी हुए हैं।

चांदनी चौक सीट पर भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी है। इस संसदीय सीट के तहत बल्ली मारन विधानसभा सीट पर पूर्व मंत्री हारून युसूफ काबिज हैं। मटिया महल भी मुस्लिम बहुल है। यहां से कांग्रेस के दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल फिर से मैदान में हैं। भाजपा ने प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन और आप ने आशुतोष को मैदान पर उतारा है। इस क्षेत्र में वैश्य मतदाताओं की संख्या भी काफी है। सिब्बल दोनों उम्मीदवारों को बाहरी और अपने काम के बूते पर वोट मांग रहे हैं।

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