विरासत सौंपने की इच्छा रखने वाले दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

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Monday, March 31, 2014-1:44 PM

लखनऊ:  यह तो 16 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपने कुनबे की अगली पीढ़ी को सियासी विरासत सौंपने की हसरत लिए छह से अधिक दिग्गजों ने इस बार खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरकर अपने बेटों और पत्नियों को उतारा है लेकिन इससे उनकी अपनी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।ही पता चल सकेगा कि वे दिग्गज अपने लाड़लों, और लाड़लियों को चुनाव जिताकर ‘माननीय’ बना पायेंगे या नहीं। कन्नौज संसदीय क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डिम्पल यादव चुनाव मैदान में हैं जिसके चलते उनके मुख्यमंत्री पति अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है।

वहीं, फिरोजाबाद सीट से अक्षय यादव के चुनाव लडऩे के चलते समाजवादी पार्टी के ‘थिंकटैंक’ कहे जाने वाले उनके पिता रामगोपाल यादव की साख भी दांव पर लगी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इस बार एटा संसदीय क्षेत्र से खुद चुनाव न लडऩे का फैसला लेते हुए अपने बेटे राजवीर को भाजपा टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा है। कल्याण सिंह ने वर्ष 2009 में हुआ पिछला लोकसभा चुनाव सपा के सहयोग से जीता था। इस बार, बेटे राजवीर को समाजवादी पार्टी के विरोध का सामना करना पड़ेगा। यहां, कल्याण सिंह की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

समाजवादी पार्टी और भाजपा अकेली पार्टिया नहीं है जहां परिवारवाद के चलते प्रतिष्ठा दांव पर हो। बहुजन समाज पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती के निकट सहयोगी माने जाने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पुत्र अफजल सिद्दीकी भी फतेहपुर सीट से चुनाव लड़कर राजनीति की शुरूआत करेंगे। वहीं, पूर्व उर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से दूसरी बार चुनाव मैदान में है।

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