जब आत्मा ने कहा, मैं कितनी परेशान हूं!

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Friday, April 04, 2014-3:14 PM

उत्तराखंड को देवी-देवताओं की देव भूमि माना जाता है जहां पर कई रहस्य व धार्मिक कथाएं प्रचलित है। परंतु हम यहां पर किसी कथा या धार्मिक रहस्यों की बात नहीं कर रहे। ब्लकि उस सच की बात कर रहे हैं जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। हम आपको उन अतृप्त आत्माओं के बारे में बताएंगे जो अभी भी हमारे बीच में हैं। ये अतृप्त आत्माएं यमलोक और पृथ्वी लोक के बीच कहीं उलझ गए हैं।

उत्तराखंड में एक प्रथा है, इस प्रथा को गढ़वाल में 'गडयाऊ' नाम से जाना जाता है। इस प्रथा के तहत पांच से सात दिनों का एक महोत्सव मनाया जाता है। इस महोत्सव में लोग अपने उन पितरों की आत्माओं को मुक्ति दिलाते हैं, जिनकी मौत किसी दुर्घटना या किसी रहस्यमय तरीके से हो गई है।

गडयाऊ का आयोजन छह महीने तक महीने में एक बार किया जाता है। गडयाऊ में ओजियों (डमरू व मंत्रोच्चार करने वाले व्यक्ति) के बुलाने पर पहले दिन अतृप्त आत्मा माध्यम के तौर पर अपने ही परिवार के किसी व्यक्ति का शरीर चुनती है। इसके बाद सात दिनों तक उस शरीर में आकर नृत्य और गीत के रूप में अपनी कहानी सुनाती है।

इस प्रथा के मुताबिक पहली बार के गडयाऊ में आत्मा अपने परिवार के ही किसी सदस्य पर आती है। लेकिन अगले छह महीनों तक यह प्रेम आत्मा पर निर्भर करता है कि वह किसका शरीर का चुनेगी। इसके बाद हर महीने उस पितृ को नचाया जाता है। यदि पितृ ने कहा कि उसकी मूर्ति बनाकर उसे उचित स्‍थान पर स्‍थापित किया जाए, तो उसकी प्रतिमा बनाकर उसे ‌स्‍थापित कर दिया जाता है और इस तरह वह मुक्ति प्राप्त कर लेता है।

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