देहात अस्पतालों में आईसीयू बना मुद्दा

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Thursday, April 03, 2014-2:53 PM

नई दिल्ली  (राजन शर्मा): दिल्ली में प्रचार अंतिम चरण में है। वहीं, मतदाताओं को राष्ट्रीय व स्थानीय मुद्दों पर जवाब देना प्रत्याशियों भारी पड़ रहा है। ऐसे ही कुछ मुद्दों पर ग्रामीण दिल्ली के मतदाता उम्मीदवारों से जवाब तलब कर रहे हैं, लेकिन किसी के पास जबाव नहीं है। 

मतदाताओं  का कहना है कि सरकार ने इलाके में अस्पताल तो बना दिया पर आई.सी.यू. न होने से बड़े हादसे के बाद तुरंत इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी मौत हो जाती है। इसके लिए जनप्रतिनिधि ही जिम्मेदार हैं। वेस्ट और नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा यही बनकर उभर रहा है। 

पिछले दिनों नरेला में एक हादसे के दौरान कई लोगों की मौत के बाद अस्पतालों में आई.सी.यू. होने का मुद्दा उछला और मुद्दे को लोगों ने चुनावी शक्ल में बदल दिया।

सकते में प्रत्याशी

स्थानीय मुद्दों को लेकर जवाब तलब से कांग्रेस, भाजपा प्रत्याशी सकते में हैं, क्योंकि अब से पहले लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जाता था, लेकिन इस बार चुनाव से पहले स्थानीय फिर राष्ट्रीय मुद्दे को रखकर लड़ा जा रहा है। 

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जागरूकता से अब राजनैतिक पार्टियों को अपना एजेंडा तक बदलना पड़ रहा है।

देहात दिल्ली में लगभग 200 गांव

वेस्ट और नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में हरियाणा बॉर्डर से लगते इलाके को दिल्ली देहात कहा जाता है। इसमें लगभग 200 गांव हैं। देश की राजधानी और पूर्ण राज्य न होने से इनमें विकास का जिम्मा केन्द्र व  राज्य दोनों सरकारों का है। बावजूद देहात दिल्ली पिछड़ा है।

इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां दिल्ली सरकार के 2 केन्द्र व नगर निगम का एक भी बड़ा अस्पताल नहीं है। आईसीयू के बिना इलाके में बड़ा हादसा होने पर लोगों को इलाज न मिलने से उनकी मौत हो जाती है। 

लंबे समय से मांग

ग्रामीण इलाके के नजफगढ़ में राव तुलाराम स्मारक और नरेला में सत्यावादी राजा हरिश्चंद्र नाम से दिल्ली सरकार के 2 अस्पताल हैं, जिन्हें बने एक दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन यहां आई.सी.यू. की सुविधा नहीं है।

राव तुलाराम स्मारक अस्पताल में आई.सी.यू. बनाने की परियोजना को स्वास्थ्य विभाग ने बनने से पहले ही ठंडे बस्ते में डाल दिया।

वहीं, सत्यावादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में आई.सी.यू. बने 10 साल हो गए, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति न होने से इसे शुरू नहीं कराया जा सका। इससे यहां लोग गुस्से में है।

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