अखिलेश यादव को बाल विवाह मामले में उच्च न्यायालय से राहत

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Friday, April 04, 2014-1:05 PM

जबलपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं उनकी सांसद पत्नी डिम्पल यादव और दो अन्य विधायकों के विरूद्ध दायर सामूहिक बाल विवाह कराने वाली याचिका को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कल खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर एवं न्यायमूर्ति के के त्रिवेदी की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद अखिलेश एवं उनकी पत्नी डिम्पल, उत्तर प्रदेश के विधायक दीप नारायण यादव और मध्यप्रदेश में उनकी विधायक पत्नी मीरा यादव के खिलाफ टीकमगढ़ निवासी गयादीन अहिरवार की तरफ से दायर जनहित याचिका को कल खारिज कर दिया।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि डॉक्टरों की रिपोर्ट पर संदेह नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा उसने माना है कि उम्र संबंधी पेश की गई अंक सूचियों की विश्वसनीयता भी संदेह में है। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया है कि जिन लड़कियों के बाल विवाह किए जाने के आरोप याचिका में लगाए गए हैं, चिकित्सकीय जांच में वे बालिग पाई गई हैं।

अहिरवार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि टीकमगढ़ जिले के ग्राम निवारी में समाजवादी पार्टी की क्षेत्रीय विधायक मीरा यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं उनकी पत्नी डिम्पल के आतिथ्य में सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन नौ मार्च 2013 को कराया था, जिसमें लगभग 25 नाबालिग जोड़ों सहित 136 जोड़ों का विवाह कराया गया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि इस संबंध में उसने आयोजकों के समक्ष आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

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