चुनावी बाजार में चायनीज का चस्का

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Sunday, April 06, 2014-1:40 PM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): देश में लोकतंत्र के इस महापर्व में चुनावी बाजार को भी चायनीय माल का चस्का लग गया है। जहां देखो सियासत के रंग बिखरे हैं, लेकिन इस बिखरे रंग में पड़ोसी देश चीन का असर ज्यादा दिख रहा है।

चुनावी मैदान में एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टियों के नेता बाजारों में एक-दूसरे से मस्करी करते हुए नजर आ रहे हैं। विभिन्न पार्टियों के नेताओं का यह संगम चीन की वजह से हो रहा है, जहां चुनाव प्रचार से जुड़ी झंडे, बैज व कटआउट समेत तमाम चीजें मिल रही हैं।


अब इसे चुनावी खर्च में चुनाव आयोग का डंडा कहें या कुछ और लेकिन हमारे देश में हो रहे लोकतंत्र के इस जलसे में चुनावी बाजार चीनी माल से पटा पड़ा है। जहां सियासी दल के खेमों में सियासत के रंग बिखरे हैं, वहीं बाजार का नजारा भी कम रंगीन नहीं।

मजे की बात ये है कि सियासी चाशनी में लिपटे ये ज्यादातर प्रॉडक्ट्स चाइनीज हैं लेकिन चुनाव प्रचार में इन चाइनीज चीजों से किसी भी पार्टी को कोई परहेज नहीं। सियासी समर में भले ही नेताओं के बीच तलवारें खिंची हों, लेकिन दुकान में सब समान हैं। एक ही जगह एक ही साथ उनके कटआउट, बैनरए बैज, झंडे दिखते और बिकते हैं। चाहे वो कांग्रेस का पंजा हो, आप की झाड़ू या फिर भाजपा का कमल। शायद ये चुनावी खर्च की सीमा ही है जिसने इनके बीच सारी दूरियां मिटा दी हैं।  मोदी की हवा का इस बाजार पर भी असर दिख रहा है।

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