कितना असर डालेंगे मुस्लिम वोट

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Monday, April 07, 2014-4:26 AM

नई दिल्ली: इस बार भी लोकसभा के चुनाव में साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा अहम है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी सभी पार्टियों के निशाने पर हैं। सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह यादव और मायावती सभी 2002 में हुए गुजरात दंगों को लेकर मोदी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को अपने पाले में करने के लिए जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी का समर्थन हासिल कर लिया है। देश के 81 करोड़ से ज्यादा वोटरों में 15 फीसदी मुस्लिम हैं। आइए देखते हैं कि देश के 7 प्रमुख राज्यों में मुस्लिम वोटर कितना असर डाल सकते हैं।

महाराष्ट्र: माना जा रहा है कि भाजपा विरोधी मतों का विभाजन रोकने के लिए यहां के मुसलमान रणनीतिक तरीके से मतदान कर सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस ने राज्य की कुल 48 सीटों में केवल एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है जबकि एन.सी.पी., शिवसेना और भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा है। 10.6 फीसदी वोट मुस्लिमों का, 9 सीटों में मुस्लिम निर्णायक साबित हो सकते हैं 8 सीटों पर सपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जबकि कांग्रेस ने 1 और ‘आप’ ने 7 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं।

उत्तर प्रदेश: यहां की आबादी का करीब 5वां हिस्सा मुस्लिमों का है। माना जा रहा है कि राज्य में मोदी लहर के खिलाफ वोटिंग होगी। यहां मुस्लिमों का वोट निर्णायक साबित होगा जिस पर भाजपा को छोड़कर बाकी सारे दलों कांगे्रस, बसपा और सपा की नजर है। 22 सीटों पर 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर 33 सीटों में मुस्लिम वोट 10 से 19 प्रतिशत तक 19 सीटों पर बसपा ने जबकि ‘आप’ ने 17, सपा ने 13 व कांग्रेस ने 9 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे।

राजस्थान: राज्य में 4 महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सभी 16 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव हार गए थे। जाहिर है कि मुस्लिमों का कांग्रेस से मोह भंग हुआ है। राज्य की कुल 25 सीटों में से 9 पर मुस्लिम मतदाता परिणाम पर असर डाल सकते हैं। 13 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की 11 फीसदी वोट मुस्लिमों का 8-9 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक हो सकते हैं, 1 मुस्लिम उम्मीदवार को कांग्रेस ने दिया टिकट हैं।

पश्चिम बंगाल: ममता अगर 2011 में राज्य में 34 साल से शासन कर रहे वाम मोर्चे को हरा पाईं, तो इसके पीछे मुस्लिमों का समर्थन एक बड़ा कारण था। यहां मुस्लिम वोट हमेशा से निर्णायक रहे हैं। जामा मस्जिद के शाही इमाम की अपील से उनका यह वोट बैंक और मजबूत होगा।25.2 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है-2001 की जनगणना के अनुसार 10 सीटों में मुस्लिम मत निर्णायक साबित हो सकते हैं, 11 सीटों पर वामदलों ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जबकि कांग्रेस ने 7, तृणमूल ने 6 और भाजपा ने 2 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे।

बिहार: यहां की 40 में से 9 सीटों पर मुस्लिमों का असर है और उनके इस बार यू.पी.ए. के समर्थन में जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बिहार में कहा जा रहा है कि सत्ताधारी जे.डी.यू. को वहीं पर वोट मिलेगा जहां यू.पी.ए. का उम्मीदवार ‘कमजोर’ माना जा रहा है।16.5 फीसदी वोट मुस्लिमों का है कुल मतदाताओं में 9 सीटों में मुस्लिम निर्णायक साबित हो सकते हैं 5 सीटों पर जद (यू) ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जबकि राजद ने 6, लोजपा ने 1, कांग्रेस ने 1, एन.सी.पी. ने 1, ‘आप’ ने 3 और सी.पी.आई.एम. ने 1 मुस्लिम उम्मीदवार उतारा।

केरल: देश में मोदी फैक्टर मजबूत होने के बावजूद माना जा रहा है कि यहां अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन उन्हें नहीं मिलेगा। अंदाजा है कि मुस्लिम और अल्पसंख्यक क्रिश्चियन कांग्रेस नीत यू.डी.एफ. (यूनाइटेड डैमोक्रेटिक फ्रंट) के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। 24 फीसदी वोट मुस्लिमों का 6 सीटों में मुस्लिम निर्णायक साबित हो सकते हैं 2 सीटों पर कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जबकि आई.यू.एम.एल. ने और सी.पी.एम. ने भी 2-2 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे।

असम: राज्य की कुल 14 सीटों पर 35 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। पहले मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था लेकिन 2009 के चुनाव में ऑल इंडिया यूनाइटेड डैमोक्रेटिक फ्रंट ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई थी। यही वजह थी कि भाजपा को राज्य में 4 सीटें हासिल हो गई थीं। 35 फीसदी वोट मुस्लिमों का 10 सीटों में मुस्लिम निर्णायक साबित हो सकते हैं 2 सीटों पर ए.आई.यू.डी.एफ. ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जबकि कांग्रेस और टी.एम.सी. ने 1-1 मुस्लिम उम्मीदवार उतारा।

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