नोटबंदी का मंत्र देने वाला शख्स पीएम मोदी से हुआ खफा

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Tuesday, November 22, 2016-1:24 PM

मुंबईः अचानक हुई नोटबंदी की घोषणा को लोग प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी का कालेधन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ बता रहे हैं। हालांकि मोदी के इस कथित सर्जिकल स्ट्राइक का आइडिया पुणे निवासी अनिल बोकिल और उनके थिंक टैंक अर्थक्रांति प्रतिष्ठान का बताया जा रहा है। बोकिल को जुलाई महीने में मोदी से मिलने के लिए महज 9 मिनट का वक्त मिला था, मगर जब बोकिल ने अपना प्लान सुनाना शुरू किया तो, यह मुलाकात करीब 2 घंटे तक खिंच गई। इस बातचीत का परिणाम नोटबंदी के रूप में सामने आया।

अब जब देशवासी बैंकों और एटीएमों के सामने लाइन लगा कर खड़े हैं, बोकिल इसका दोष सरकार पर मढ़ रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने उनके सुझाव को यथारूप मानने के बजाय अपनी पसंद के अनुसार लागू किया है। उन्होंने मुंबई मिरर से कहा कि मंगलवार को वह प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे थे। हालांकि, मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से कोई कन्फर्मेशन नहीं आया था।

कालेधन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ में क्या गड़बड़ी हुई, इस बारे में अनिल बोकिल का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने एक व्यापक प्रस्ताव रखा था, जिसके 5 आयाम थे। हालांकि, सरकार ने इनमें सिर्फ 2 को ही चुना। यह अचानक उठाया गया कदम था, ना कि बहुत सोचा-समझा। इस कदम का ना ही स्वागत किया जा सकता है और ना ही इसे खारिज कर सकते हैं। हम इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं। हमने सरकार को जो रोडमैप दिए थे, उससे ऐसी परेशानियां नहीं होतीं।

बकौल बोकिल उन्होंने सरकार से कहा था
1. केंद्र या राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय निकायों द्वारा वसूले जाने वाले प्रत्यक्ष और परोक्ष, सभी करों को पूर्ण रूप से खत्म कर दिया जाए।
2. ये टैक्सेज बैंक ट्रांजैक्शन टैक्स (बीटीटी) में तब्दील कर दिए जाएं जिसके अंतर्गत बैंक के अंदर सभी प्रकार के लेनदेन पर लेवी (2 प्रतिशत के करीब) लागू कर दी जाए। यह प्रक्रिया सोर्स पर सिंगल पॉइंट टैक्स लगाने की होती। इससे जो पैसे मिलते उसे सरकार के खाते में विभिन्न स्तर (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय आदि के लिए क्रमश: 0.7, 0.6, 0.35 फीसदी के हिसाब से) पर बांट दिया जाता। इसमें संबंधित बैंक को भी 0.35 फीसदी हिस्सा मिलता। हालांकि, बीटीटी रेट तय करने का हक वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास होता।
3. कैश ट्रांजैक्शन (निकासियों) पर कोई टैक्स नहीं लिया जाए।
4. सभी तरह की ऊंचे मूल्य की करंसी (50 रुपए से ज्यादा की मुद्रा) वापस लिए जाएं।
5. सरकार निकासी की सीमा 2,000 रुपए तक किए जाने के लिए कानूनी प्रावधान बनाए।

बोकिल का कहना है कि अगर ये सभी सुझाव एकसाथ मान लिए गए होते, तो इससे ना केवल आम आदमी को फायदा होता बल्कि पूरी व्यवस्था ही बदल गई होती। हम सबकुछ खत्म होता नहीं मान रहे। हम सब देख रहे हैं लेकिन सरकार ने बेहोशी की दवा दिए बिना ऑपरेशन कर दिया इसलिए मरीजों को जान गंवानी पड़ी। हम इस प्रस्ताव पर 16 सालों से काम कर रहे हैं जब अर्थक्रांति साल 2000 में स्थापित हुई।
 


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