जगन्नाथ मंदिर के लिए ‘कस्तूरी’ की व्यवस्था करेंगी नेपाल की राष्ट्रपति

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Friday, April 21, 2017-8:05 PM

पुरी : नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने यहां जगन्नाथ मंदिर के लिए ‘कस्तूरी’ की व्यवस्था करने के लिए जरूरी कदम उठाने का आज वादा किया। भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा के लिए जरूरी कस्तूरी की गंभीर कमी को दूर करने के लिए उन्होंने कदम उठाने का वादा किया।

भंडारी ने संवाददाताओं से कहा कि वह नेपाल सरकार के समक्ष कस्तूरी की कमी के मुद्दे को उठाएंगी। इसे मृग की नाभि से हासिल किया जाता है। उन्होंने 12 वीं सदी में निर्मित मंदिर में पूजा की। भंडारी ने कहा कि वह समस्या का समाधान करने के लिए उचित कदम उठाएंगी ताकि मंदिर अधिकारी बिना किसी बाधा के देवी-देवताओं की पूजा और परंपराओं को जारी रख सकें।

दुर्लभ और कीमती कस्तूरी पहले श्री जगन्नाथ मंदिर को पड़ोसी देश में राजशाही के दौरान नेपाल से मिलती थी। चूंकि नेपाल से प्राप्त होने वाली कस्तूरी की शुद्धता और गुणवत्ता को बेहद उच्च माना जाता है, इसलिए इसका इस्तेमाल देवी-देवताओं की विशेष पूजा के लिए किया जाता है। भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने के बाद खुशी का इजहार करते हुए भंडारी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, केंद्र और आेडि़शा सरकार का उनकी यात्रा का प्रबंध करने के लिए शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने पुरी के निवासियों और सेवकों का भी शुक्रिया अदा किया। भारत और नेपाल के बीच मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ वर्षों पुराना मैत्रीपूर्ण संबंध होने की बात पर गौर करते हुए उन्होंने उमीद जताई कि द्विपक्षीय संबंध भविष्य में भी जारी रहेंगे। भंडारी ने भारत के विकास की भी कामना की। नेपाली राष्ट्रपति दो दिन की आेडि़शा यात्रा पर थीं। उन्होंने कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन किए और पूजा की।

भंडारी ने मंदिर परिसर में तकरीबन 40 मिनट बिताए। मंदिर के सिंह द्वार के निकट जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, मंदिर प्रशासन और सेवकों ने स्वागत किया। उनकी यात्रा के लिए मंदिर के भीतर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर में अन्य श्रद्धालुओं का प्रवेश उस दौरान रोक दिया गया था। 

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