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शिक्षकों को रैगुलर करने का मुद्दा : अप्रूवल को गई फाइल 4 माह से लटकी

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Monday, November 21, 2016-9:19 AM

चंडीगढ़(रश्मि रोहिला) : सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों को रैगुलर करने का मुद्दा लंबे समय से चल रहा है। जिस समय सर्व शिक्षा अभियान के तहत अध्यापकों को नियुक्त किया गया था तो उसे केन्द्र की स्वीकृत्ति न देकर शिक्षा विभाग की सोसायटी की तरफ से कर दी गई थी। उस समय सोसायटी की तरफ से की गई भर्ती भी पूरी सीटों पर नहीं हुई थी। केन्द्र ने 1375 सीटों को भरने के आदेश दिए थे, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन ने मात्र नौ पोस्टें ही भरी गई थीं। प्रशासन की तरफ से जो पोस्टें भरी गई थीं उन्हें सोसायटी से हटाकर रैगुलर करने के लिए पिछले दो सालों से एस.एस.ए. की तरफ से संघर्ष किया जा रहा है। 

 

सर्व शिक्षा अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद राणा ने कहा कि दो साल पहले एम.एच.आर.डी. को इस मामले पर कार्रवाई करने की अपील की गई थी। उस समय प्रोसैस शुरू हुआ और करीब चार महीने पहले एम.एच.आर.डी. यू.टी. के डिप्टी डायरैक्टर के पास फाइल भेजी गई। चार महीने का समय बीत चुका है, लेकिन फाइल उसी अधिकारी के पास पड़ी है उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

तो करेंगे संघर्ष :
राणा ने कहा कि फाइल पर काम करने के लिए लंबे समय से आग्रह किया जा रहा है लेकिन यदि कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई तो जल्द ही यू.टी. के एस.एस.ए. के तहत काम करने वाले अध्यापक संघर्ष शुरू कर देंगे, जिसका परिणाम बेहतर नहीं होगा। राणा ने कहा कि इससे पहले भी कई बार मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष किया गया है जिसके लिए सभी अध्यापकों ने एम. एच. आर.डी. से संपर्क साधा था। 

 

ग्रांट पूरी नहीं आई :
राणा ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो केन्द्र से ग्रांट आती है वह भी पूरी नहीं आ पाई है। करीब 70 करोड़ के आप-पास की ग्रांट आई थी लेकिन अब तक मात्र 30 करोड़ रूपये ही खर्च हो पाएं। 

ऐसी स्थिति में अध्यापकों को सैलरी नहीं मिलती और जो पैसा आने वाला होता है उसे केन्द्र सरकार देती ही नहीं है। इस पर उन्होंने विभाग से अपील की है कि फंड को जल्द से जल्द हो। 

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