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उत्तराखंड में पुनर्निर्माण में जुटे हैं युवा जापानी

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Friday, February 28, 2014-1:31 AM

बटवारी सोनार (उत्तराखंड): जापान के छात्रों के एक छोटे से दल ने पिछले साल केदारनाथ क्षेत्र में मची तबाही का सामना कर चुके उत्तराखंड में घर और सामुदायिक भवन बनाने में मदद करने का काम हाल ही में खत्म किया है। 43 युवतियों और 30 युवकों के जत्थे ने टेढ़े-मेढ़े पहाड़ी रास्ते से मंदाकिनी नदी से बोल्डर और बालू ढोने का काम किया। चढ़ाई और उतार वाले रास्ते पर सुबह से शाम तक यह दल अपना काम करता रहता था।

आधा दर्जन लड़कियां और लड़के बालू खोदते और फिर उन्हें पाट के बोरों में भरते थे जिसे जापानी छात्र एक दूसरे को सौंपते हुए नदी से करीब 350 मीटर ऊपर पहुंचाते थे। उनका काम ठीक उसी तरह का होता था जैसे क्रमिक दौर हो रहा हो। नदी से लाए जा रहे बालू को इस गांव के एक मंदिर के प्रांगण में जमा किया जाता था। छोटे और बड़े पत्थर भी हाथ से ढोए गए और बालू के चारों तरफ इस तरह सजा कर रखा गया मानों वे सुरक्षा दीवार बना रहे हों।

यह काम जाहिरा तौर पर आसान नहीं था। 18 से 23 की उम्र के जापानी लड़के-लड़कियों के सुहाने मौसम में भी पसीने बहते रहे। कामगारों के ढीले कपड़े, धूप चश्मा और कपड़े की टोपी पहने हुए अपने काम में जुटे रहे। धूल से बचने के लिए कुछ ने चेहरे पर नकाब भी चढाया। अम्मा के नाम से मशहूर माता अमृतानंदमयी की वित्तीय सहायता से भूकंप रोधी दो कमरे के घर बनाने के काम में ये युवक-युवती जुटे रहे।

फुकुशिमा के रहने वाले नागाहिरो आकियामा (22) ने बताया कि वे भारत क्यों आए हुए हैं। दो भाषिए की मदद से उसने आईएएनएस को बताया, ‘‘दो वर्ष पहले मैं आंध्र प्रदेश में था और यह देख कर दुखी हो गया कि किस तरह गरीब लोग रहते हैं। भारत में गरीबों की जिंदगी हम जापानियों से भिन्न है।’’ उसने कहा, ‘‘हम दूसरों की मदद कर सकते हैं, इससे पीड़ितों को ऊर्जा मिलती है। हम भारतीयों को कुछ यादगार स्मृति देना चाहते हैं।’’

उनके इस काम से बटवारी सोनार गांव के करीब 60 परिवार काफी प्रभावित हैं। जापानी छात्रों के काम सहयोग बंटा रहे स्थानीय युवक 20 वर्षीय विकास लिंगवाल ने कहा कि हमें उनकी टीम भावना और अनुशासन का अनुसरण करने की आवश्यकता है। उत्तराखंड त्रासदी में बटवारी सोनार में 692 लोगों की मौत हो गई थी। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक राज्य में त्रासदी से राज्य में पांच हजार लोगों की मौत हुई, जबकि अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा थी।


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