एचपीसीए मामले में अदालत ने मांगी सरकार से ताजा रिपोर्ट

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Wednesday, March 05, 2014-12:17 PM

शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज राज्य सरकार को निर्देश दिया कि एचपीसीए के खिलाफ दर्ज मामले में ताजा जांच रिपोर्ट 11 मार्च तक सीलबंद लिफाफे में जमा की जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए क्रिकेट संघ द्वारा दाखिल याचिका पर ये आदेश पारित किये। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी अस्पष्ट, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक झगड़े का नतीजा थी। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ को धर्मशाला में उसके स्टेडियम के पास खिलाडिय़ों के लिए आवासीय परिसर बनाने के मकसद से जमीन आवंटित करने में कथित अनियमितताओं पर एचपीसीए के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।

सतर्कता ब्यूरो ने आवंटित जमीन पर यूजीसी के आर्थिक सहयोग से शिक्षकों के आवास के लिए निर्मित शिक्षा विभाग की इमारत को गिराने के सिलसिले में भी मामला दर्ज किया था। अदालत ने पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले की सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की। सतर्कता ब्यूरो के सूत्रों ने कहा कि मामले में जांच पूरी हो गई है लेकिन अदालत में चालान दाखिल करना 11 मार्च के बाद ही संभव हो पाएगा। सतर्कता ब्यूरो ने एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर से दो बार पूछताछ की थी और उनसे स्पष्ट करने को कहा था कि एचपीसीए को कंपनी में क्यों बदल दिया गया जो एक सोसायटी है।
 


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