झूठा कौन, शिवराज या मनमोहन?

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Friday, March 07, 2014-5:31 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश में आसमान से बरसी आफत ने फसलों को चौपट कर किसानों के चेहरों को रुआंसा कर दिया है, मगर सियासत करने वालों को किसानों के दर्द से ज्यादा चुनावी नफा -नुकसान की चिंता है, तभी तो दोनों प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। वे एक-दूसरे को झूठा करार दे रहे हैं।

ओलावृष्टि और भारी बारिश ने राज्य के 51 में से 49 जिलों में जमकर कहर बरपाया है, फसलों को चौपट कर दिया है। खेत हरे मैदान में बदल गए हैं, फसल खड़ी नहीं है, बल्कि बिछ गई है। किसानों को इस समय मदद की दरकार है, ताकि वे इस संकट की घड़ी से अपने को उबार सकें। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की मदद के लिए दो हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की है, साथ ही अधिकारियों को जल्द से जल्द सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कर्ज का ब्याज माफ  करने, एक रुपये किलो की दर से गेहूं देने और बेटियों की शादी के लिए 25 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है।

उन्होंने केंद्र सरकार से पांच हजार करोड़ का विशेष पैकेज दिए जाने की मांग करते हुए केंद्र सरकार पर राज्य के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार हर क्षेत्र में राज्य से उपेक्षा का बर्ताव करती आ रही है। अब किसानों के मुआवजे के मामले में भी यही हो रहा है। चौहान का आरोप है कि दिल्ली में रहते हुए उन्होंने किसानों के लिए विशेष पैकेज हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात का समय मांगा, मगर उन्हें दिया नहीं गया। उसके बाद चौहान ने केंद्र सरकार पर जमकर हमले किए और कहा कि प्रधानमंत्री ने संघीय व्यवस्था का सम्मान नहीं किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से जो राशि मांग रही है वह जनता का पैसा है। भाजपा ने गुरुवार को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया था और मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार आधे दिन के उपवास पर रही। दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने मुख्यमंत्री चौहान पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चौहान ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मुलाकात का समय ही नहीं मांगा था और जब चौहान दिल्ली में होने की बात कह रहे हैं, तब प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर थे।

यादव ने बताया है कि बीते रोज कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल किसानों को राहत देने के मसले पर प्रधानमंत्री से मिला तो उन्होंने कहा कि वे इस बात से दुखी हैं कि मुख्यमंत्री गलत प्रचार कर रहे हैं कि उन्हें मुलाकात करने का समय नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने अभी तक सर्वेक्षण और मदद के लिए कोई पत्र केंद्र सरकार को नहीं भेजा है।

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है कि प्राकृतिक आपदा पर राजनीति करना ठीक नहीं है। भाजपा सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किसी भी हद पर जा सकती है, यह बात मुख्यमंत्री और उनकी सरकार ने उपवास कर जाहिर कर दिया है। यह किसानों के साथ मजाक है। सरोज ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो किसानों के लिए दूसरे तरीके से मदद मुहैया करा सकते है, मगर प्रधानमंत्री द्वारा मुलाकात करने का समय न दिए जाने का बहाना बनाना उचित नहीं है।

बहरहाल, इतना तो साफ  हो ही गया है कि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री में से कोई एक झूठ बोल रहा है। किसानों को राहत दिलाने के नाम पर शुरू हुई सियासत और एक-दूसरे पर झूठ बोलने के आरोप का सच तभी सामने आएगा, जब राज्य सरकार कोई ऐसा दस्तावेज जारी करे जो समय मांगने का प्रमाण हो या प्रधानमंत्री कार्यालय सामने आकर मुख्यमंत्री की बात का खंडन करे।


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