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चुनावी हलचल: चिदम्बरम की नजर राज्यसभा सीट पर, ममता का लक्ष्य 45 से अधिक

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Monday, March 10, 2014-10:15 AM

नई दिल्ली: वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने पार्टी उच्चकमान को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि वह शिवगंगा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से पुन: चुनाव नहीं लड़ेंगे। बताया जाता है कि वह भी कृषि मंत्री शरद पवार की तरह राज्यसभा में जाने के इच्छुक हैं। हालांकि वह तमिलनाडु से संबंध रखते हैं मगर अपने गढ़ माने जाने वाले शिवगंगा निर्वाचन क्षेत्र से वह अपने बेटे काॢतकेय को चुनाव लड़वाना चाहते हैं और उसे उभारना चाहते हैं तथा खुद कर्नाटक से राज्यसभा में जाने के इच्छुक हैं। तमिलनाडु में किसी सहयोगी के बिना कांग्रेस की स्थिति दयनीय है और पार्टी वहां अधिक सीटें जीतने की स्थिति में नहीं है।

राज्य में डी.एम.डी.के., एम.डी.एम.के. और पी.एम.के ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया है। अन्नाद्रमुक और द्रमुक अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। पी.सी. ने सुझाव दिया है कि लोकसभा की टिकट उनके पुत्र काॢतकेय चिदम्बरम को दी जाए। राहुल गांधी इस बात पर अडिग हैं कि सभी मौजूदा और वरिष्ठ मंत्री अपनी-अपनी सीटों से चुनाव लड़ें। 

विलय रुका, 2 सीटें मिलीं
भाजपा नेता सुषमा स्वराज कर्नाटक में बी.एस.आर. कांग्रेस के भगवा पार्टी में विलय को रोकने में सफल रही हैं मगर राजनाथ सिंह ने बी.एस.आर. कांग्रेस नेता श्री मुल्लू और शांता के लिए 2 लोकसभा टिकटों की मंजूरी दे दी है। यह अनंत कुमार के लिए एक और धक्का है जो बी.एस. येद्दियुरप्पा के प्रत्येक कदम का विरोध कर रहे हैं।

छोटी पाॢटयों की मांग
लोकसभा चुनावों में छोटी पाॢटयों की काफी मांग है और ऐसा दिखाई देता है कि भाजपा चुनावी मौसम का फायदा उठा रही है। मित्रहीन भाजपा के पास अब 10 सहयोगी हैं और कुछ और दल भी साथ जुडऩे के इंतजार में हैं। तेदेपा और भाजपा गठबंधन की घोषणा इस सप्ताह हो जाएगी। ए.जी.पी. भी अंतत: साथ आ जाएगी। सभी निगाहें अब पी.ए. संगमा और उनकी पुत्री पर टिकी हुई हैं। वह तृणमूल कांग्रेस से भी बातचीत कर रहे हैं। संगमा मेघालय में स्थिति को बदल सकते हैं जहां लोकसभा की 2 सीटें हैं।

ममता का लक्ष्य 45 से अधिक
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुपचाप वह कर दिखाया जो अन्य मोर्चे और प्रधानमंत्री पद के चाहवान शोर मचाने के बाद भी नहीं कर पाए। ममता ने चुपचाप अन्ना हजारे को अपने प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए राजी कर लिया और इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल व बाहर भी लोकसभा की सीटों पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है। ममता त्रिपुरा, मणिपुर, ओडिशा में 1-1 और झारखंड, असम में 2-2 सीटों पर निशाना लगाए हुए हैं। पश्चिम बंगाल में ममता को 30-35 सीटें मिलने की उम्मीद है। अन्ना के समर्थन और के.डी. सिंह के संसाधनों की बदौलत ममता को उत्तर भारत में भी कुछ सीटें मिलने की उम्मीद है। 45 सीटों के साथ वह 16वीं लोकसभा में कांग्रेस और भाजपा के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी।


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