लोकसभा चुनाव: राजनीति में उछल-कूद का दौर, छोड़ गए अपनों का साथ

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Thursday, March 13, 2014-9:16 AM

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव की लड़ाई शुरू होने में अब एक माह से भी कम समय रह गया है और ऐसे में पूरे देश में नेताओं का राजनीतिक प्रतिबद्धता बदलने का सिलसिला जारी है। जिसे जिधर फायदा नजर आ रहा है वह उसी दल के साथ हो रहा है और पुराने घर-दोस्त को छोड़ रहा है। राज्य दर राज्य प्राय: सभी राजनीतिक दलों को झटका लग रहा है। इस खेल में सबसे ज्यादा नुकसान में कांग्रेस दिखाई दे रहा है। पार्टी के हाथ सत्ता फिसलने के बढ़ते संकेतों के कारण इससे नाता तोडऩे वालों की संख्या कहीं ज्यादा है।

इसके विपरीत खुद को अगला प्रधानमंत्री मान बैठे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने वालों की कतार लगी हुई है। पार्टी ने बिहार में रामविलास पासवान नीत लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को दोस्त बनाया है।

कांग्रेस को सबसे ज्यादा झटका आंध्र प्रदेश में लगने जा रहा है जहां पार्टी ने तेलंगाना को पृथक राज्य के रूप में गठित करने का फैसला लिया। इसी फैसले की परिणति के रूप में जहां मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी ने पार्टी छोड़ नई पार्टी खड़ी कर ली, वहीं कई नेता इधर से उधर हो गए।

पार्टी के लिए दूसरा झटका केंद्रीय मंत्री डी. पुरंदेश्वरी के रूप में लगा है। उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया।

तेलंगाना में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के तीन पूर्व विधायक तेलंगाना राष्ट्र समिति में चले गए हैं। कर्नाटक में भ्रष्टाचार के आरोपों में पद से त्याग पत्र देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की भाजपा में वापसी हो गई है।

‘आया राम गया राम’ संस्कृति की जन्मभूमि हरियाणा में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। अंबाला के विधायक और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विश्वासपात्र विनोद शर्मा ने पार्टी छोड़ दी। यही काम कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी किया और वे भाजपा में चले गए।

बिहार में टूट-फूट का सिलसिला जारी है। राज्य में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होता दिखाई दे रहा है जहां राज्य में सत्ताधारी जनता दल (युनाइटेड), कांग्रेस-राजद गठबंधन और भाजपा-लोजपा गठबंधन के बीच मुकाबला तय है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद को उस समय बड़ा झटका लगा जब पाटलीपुत्र सीट को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण लंबे समय के उनके विश्वासपात्र रामकृपाल यादव भाजपा में चले गए। असल में पाटलीपुत्र से लालू ने अपनी बेटी मीसा भारती को प्रत्याशी बनाया है जबकि इस सीट से रामकृपाल दांव आजमाना चाहते थे। अब वह मीसा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में भिड़ेंगे।

राजद के एक और प्रमुख नेता गुलाम गौस ने जद-यू का दामन थाम लिया है और भाजपा के निलंबित विधायक अवनीश कुमार सिंह भी जद-यू में चले गए हैं। 17 वर्षों तक दोस्त रहने वाली जद (यू) ने मोदी को नेता बनाए जाने के सवाल पर भाजपा से नाता तोड़ लिया। जद (यू) के छेदी पासवान भी फूटकर भाजपा में चले गए हैं।

असम में एक समय की लोकप्रिय पार्टी रही असम गण परिषद (अगप) को उस समय तगड़ा झटका लगा जब उसके पूर्व अध्यक्ष चंद्र मोहन पटवारी और उनके एक साथी हितेंद्रनाथ गोस्वामी भाजपा में चले गए।

ओडिशा में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही झटका लगा है। दोनों पार्टियों के करीब एक दर्जन नेता राज्य में सत्ताधरी बीजू जनता दल (बीजद) में शामिल हो गए हैं।

इधर से उधर जाने वालों में से एक कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हैं। उनकी शिकायत है कि पार्टी में वरिष्ठों का सम्मान नहीं है।

झारखंड में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के एक सांसद कामेश्वर बैठा और एक विधायक हेमलाल मुर्मू ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। मुर्मू भाजपा से टिकट पाने की आशा में हैं। कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर दुबे ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा है।

महाराष्ट्र में शिवसेना के तीन सांसद इधर से उधर हो गए हैं। आनंद परांजपे (ठाणे) और गणेश दुधगांवकर (परभणी) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस का दामन थाम लिया है और भाउसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

राजनीतिक रूप से सबसे अहम उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टूट-फूट कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में दिख रही है। कांग्रेस के पुराने भरोसेमंद जगदंबिका पाल ने पाला बदल कर भाजपा का दामन थाम लिया है।

सपा के सांसद बृजभूषण शरण सिंह भाजपा की ओर हो गए हैं, जबकि पुराने सपा नेता अमर सिंह और जयप्रदा राष्ट्रीय लोकदल के साथ हो गए हैं।

केरल में घटे एक असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम में रेव्यूलेशनरी सोसलिस्ट पार्टी (आरएसपी) 40 वर्ष पुरानी वामपंथी मोर्चा से अपना नाता खत्म कर लिया और कांग्रेस नीत लोकतांत्रिक मोर्चा में शामिल हो गई। दूसरी तरफ कांग्रेस से लंबे समय से जुड़े रहे फिलिप्स थॉमस अब वामपंथी मोर्चा समर्थित प्रत्याशी होंगे।

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस और वाम मोर्चा दोनों के कई नेताओं को अपनी तरफ खींचने में कामयाबी पाई है, लेकिन सोमेन मित्रा फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

पंजाब में कांग्रेस विधायक जीत मोहिंदर सिंह सत्ताधारी अकाली दल में शामिल हो गए हैं, लेकिन पीपुल्स पार्टी के प्रमुख मनप्रीत सिंह बादल ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ किया है।

तमिलनाडु में कांग्रेस के तीन विधायक एआईएडीएमके में चले गए हैं। कुछ नेताओं ने आप को भी अपनी मंजिल बनाया है।


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