जानिए, वोट करने के बाद आपकी उंगली पर लगने वाली स्याही का राज

  • जानिए, वोट करने के बाद आपकी उंगली पर लगने वाली स्याही का राज
You Are HereNational
Thursday, March 13, 2014-6:21 PM

नई दिल्ली: आप जब वोट डालने जाते हैं तो मतदान आपकी उंगली पर स्याही का एक निशान लगा दिया जाता है। यह निशान महीना भर आपकी उंगली पर रहता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी पक्की स्याही आती कहां से है। इस स्याही का उत्पादन मैसूर स्थित सरकारी क्षेत्र की कंपनी मैसूर पैंटस एंड वारनिश कंपनी द्वारा किया जाता है। जोकि अपने नाम के मुताबिक मूलत: पेंट व वार्निश बनाती है व चुनाव के मौके पर चुनाव आयोग के आर्डर पर यह स्याही भी तैयार करती है।

देश में इस तरह की स्याही बनाने वाली यह एकमात्र कंपनी है। पहली बार न मिटने वाली स्याही का इस्तेमाल तीसरे आम चुनाव में 1962 में हुआ था। इसके निर्माण की कहानी भी काफी रोचक है। इस स्याही का फार्मूला भी पेप्सी के फार्मूले की तरह ही गुप्त रखा गया है। यह फार्मूला दिल्ली स्थित नेशनल फिजिकल लैब द्वारा तैयार किया गया है जिसे कि इसके बदले में रायल्टी मिलती है। इसका मुख्य रसायन सिल्वर नाइट्रेट है जोकि पांच से 25 फीसद तक होता है। मूलत: बैंगनी रंग का यह रसायन प्रकाश में आते ही अपना रंग बदल देता है व इसे किसी भी तरह से मिटाया नहीं जा सकता है।


जिस कंपनी में यह तैयार किया जाता है वह मैसूर के राजा नलवाडी कृष्णराज वाडियार द्वारा 77 साल पहले स्थापित की गई थी। आजादी के बाद राज्य सरकार ने उसका राष्ट्रीयकरण कर डाला। हालांकि महाराजा के परिवार का इस कंपनी में एक फीसद के करीब हिस्सा है। इस चुनाव में जिन 81 करोड़ मतदाताओं पर इस स्याही का इस्तेमाल किया जाएगा उसका खर्च, कुल चुनाव खर्च का लगभग एक फीसद या 13 करोड़ आने की संभावना है। यह स्याही छोटी-छोटी बोतलों या फायल में उपलब्ध कराई जाती है। इस कंपनी के 77 कर्मचारियों ने इसका उत्पादन शुरु कर दिया है। इसकी 10 मिलीलीटर की बोतल की कीमत 183 रुपए हैं जिससे 700 लोगों की उंगलियों पर निशान लगाए जा सकते हैं।

यह कंपनी देश में होने वाले चुनाव के लिए ही नहीं बल्कि मालदीव, मलेशिया, कंबोडिया, अफगानिस्तान, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका में भी इस स्याही की सप्लाई करती रही है। जहां भारत में बांए हाथ की दूसरी उंगली के नाखून पर इसका निशान लगाया जाता है वहीं, कंबोडिया व मालदीव में इस स्याही में उंगली डुबानी पड़ती है। बुरंडी व बुर्कीना फासो में इसे हाथ पर ब्रश से लगाया जाता है। अफगानिस्तान में इसे पैन के माध्यम से लगाया गया था।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You