बीमार मरीजों का इलाज करें या अदालत इसे सुनिश्चित करेगी

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Thursday, March 20, 2014-10:55 PM

नई दिल्ली: गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के लिए धन के अभाव या मुफ्त इलाज प्रदान करने के लिए नीति नहीं होने से व्यथित दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज दिल्ली सरकार से कहा कि वह कोई रास्ता निकाले या वह उनके जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए संविधान के तहत कोई उपचार ढूंढ निकालेगा।

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ‘‘कोई नीति होनी चाहिए। लेकिन मुझे कोई नीति नहीं मिल रही है। हम उन्हें (गंभीर रूप से बीमार मरीजों को) धन के अभाव में मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। राज्य को कुछ करना होगा। मैं तमाशबीन बना नहीं रह सकता।’’ अदालत ने कहा, ‘‘आप यह नहीं कह सकते कि मानव जीवन रक्षा करने लायक नहीं है। संविधान रहने का फिर क्या मतलब है जब सिर्फ धनी और ताकतवर लोगों को ही लाभ मिल सकता है। हम संविधान में तब ऐसे उच्च आदर्श नहीं रख सकते जिसे हम लागू नहीं कर सकते।’’

अदालत ने कहा, ‘‘अगर कोई न्यायाधीश, सरकारी पदाधिकारी आदि इस बीमारी से पीड़ित होता तो उसकी आवश्यकताओं का खयाल रखा जाता। ऐसे में संसाधनों के अभाव में आम आदमी क्यों भुगते।’’ अदालत ने यह टिप्पणी दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की। एक याचिका में एक रिक्शा चालक के नाबालिग बेटे के इलाज की मांग की गई है। वह गौशर (आनुवंशिक बीमारी) से पीड़ित है। दूसरी याचिका हीमोफीलिया से पीड़ित एक व्यक्ति ने दायर की है। वह व्यक्ति बिस्तरों पर पड़ा है और उसने सरकारी खर्च पर अपना इलाज किए जाने की मांग की है क्योंकि उसके परिवार के पास धन नहीं है।


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