कांग्रेस घोषणा-पत्र: 5 सालों में क्या बदला

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Thursday, March 27, 2014-5:16 AM

नई दिल्ली : 5 साल पहले भी कांग्रेस ने कमोबेश यही मुद्दे उठाए थे, जो इस घोषणा-पत्र में हैं। इनमें से बहुत कम मोर्चों पर पार्टी को सफलता मिली है। खाद्य सुरक्षा कानून, लोकपाल बिल और भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो चुका है लेकिन न तो रोजगार के अवसर बढ़े हैं और न ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। पिछले 5 सालों में कांग्रेस पारदर्शिता को लेकर लगातार कटघरे में रही। भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे 2 बड़े सवालों का उसके पास कोई जवाब नहीं था। एक बार फिर इंतजार कीजिए और देखिए कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इनमें से कितनों पर अमल हो पाता है।
 
आज के वादे
* सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार दिया जाएगा।
* देश के सभी आश्रयहीन या आवासहीन लोगों को आवास की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
* 10 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ ही अगले 5 वर्षों में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
* प्राइवेट सैक्टर में एस.सी. और एस.टी. उम्मीदवारों को आरक्षण देने का भी वादा है।
* कमजोर और जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को पैंशन दी जाएगी।
* बी.पी.एल. से ऊपर मौजूद 80 करोड़ आबादी को अगले 5 सालों में मिडल क्लास में लाने की कोशिश होगी।
* महिला आरक्षण बिल पास कराने के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सिटीजन चार्टर लाया जाएगा।
* महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सैल्फ हैल्प ग्रुप को सस्ती ब्याज दर पर एक लाख तक का लोन मिलेगा।
* मिडल, हायर एजुकेशन पर जोर दिया जाएगा। छात्रों के हितों के संरक्षण के लिए नैशनल स्टूडैंट कमिशन का गठन होगा।
* शहरों में झुग्गियों की जगह 2017 तक पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे।
* 10 लाख की आबादी वाले शहरों में हाई स्पीड ट्रेन चलाई जाएगी।
* आर्थिक वृद्धि दर 3 साल में 8 प्रतिशत वार्षिक करने का लक्ष्य।
* उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी) एवं प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के प्रस्तावों को लागू किया जाएगा। 

2009 का घोषणापत्र
* महीने में 25 किलो गेहूं या चावल 3 रुपए किलो की दर से देना
* सुरक्षा का उच्चतम स्तर हासिल करना। रक्षा बलों और उनके परिवार के कल्याण के लिए उपाय करना।
* पुलिस सुधार को गति देना।
* नरेगा को आगे ले जाना।
* राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करना।
* सभी के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा।
* राष्ट्रीय स्तर पर कार्यकुशलता कार्यक्रम को लागू करना।
* किसानों और उनके परिवारों के उत्थान के लिए योजनाओं का विस्तार करना।
* को-आप्रेटिव्स को लोकतांत्रिक और प्रोफैशनल बनाना।
* समाज के कमजोर तबकों के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करना।
* चुनी गई पंचायतों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना। 
* 3 साल में सारे गांवों को ब्राडबैंड नैटवर्क से जोडऩा।
* छोटे और मध्यम उद्यमियों पर विशेष ध्यान देना।
* महंगाई को रोकना और राजस्व में वृद्धि करना।
* 1 अप्रैल 2010 से गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू करना।
* सरकार में युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना।

रोजगार
* कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात की है। इस साल इतने ही नए वोटर भी हैं।
* देश में 2012-13 में बेरोजगारी 13.3 फीसदी थी, इसमें 15 से 29 आयु वर्ग के लोग शामिल थे।
* देश में कुल आबादी का 66 फीसदी युवा हैं, ये 35 साल से कम उम्र के हैं।
* देश में शिक्षा का स्तर बीते कुछ सालों में बढ़ा है लेकिन कार्यकुशलता अभी भी गंभीर मुद्दा है। केरल में शिक्षा दर सबसे ज्यादा होने के साथ ही बेरोजगारी दर भी सबसे ज्यादा 10 फीसदी है।
* 1999 से 2004 के बीच देश में 6 करोड़ नई नौकरियां पैदा हुईं, जबकि 2004-2005 से 2009-2010 के बीच केवल 27 लाख नई नौकरियां पैदा हुईं।
* फिलहाल देश में कुल बेरोजगारों की सटीक संख्या मालूम नहीं है लेकिन इतना कह सकते हैं कि काम करने लायक 1000 लोगों में से 27 लोग बेरोजगार हैं।

स्वास्थ्य
* देश में पुरुषों की औसत आयु 64 और महिलाओं की औसत आयु 67 साल है।
* 1 साल से कम उम्र के 17 लाख से ज्यादा बच्चे हर साल अलग-अलग बीमारियों से मर जाते हैं।
* 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 1970 में 64 थी जो 2009 में 50 तक आ गई है, यह बहुत धीरे-धीरे घट रही है।
* 2011 में टी.बी. बीमारी को दवाइयों से पूरी तरह से ठीक करने का दावा किया गया और 2012 में देश को पोलियो फ्री घोषित किया गया।
* एच.आई.वी. पॉजीटिव लोगों की संख्या के मामले में देश का दुनिया में तीसरा नंबर है।
* डायरिया से जुड़ी बीमारियां बच्चों की मौत की मुख्य वजह है। ये स्वच्छता की खराब स्थितियों और पीने के लिए मिलने वाले गंदे पानी से पैदा होती हैं।
* प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी अस्पताल पर्याप्त नहीं हैं। इनका रखरखाव भी बेहतर नहीं है।

सपना है अपना घर
देश में करीब 7.80 करोड़ लोग बेघर हैं। इनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है। देश भर में करीब 1.80 करोड़ आवास की कमी है। ऐसे में जनता के सामने सिर छुपाने के लिए जगह तलाशना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। 2011 की जनगणना के अनुसार, पिछले दशकों में करीब 5 करोड़ घर देश में बढ़े हैं। इसका भी सबसे बड़ा कारण बैंकों की होम लोन देने की नीति में लचीलापन होना है। इसके बावजूद आंकड़ों पर नजर डालें तो शहरी क्षेत्रों में ही करीब 5 लाख घरों की कमी है। 2003 में दुनिया के सबसे धनी देशों की सूची में भारत का 124वां स्थान था। इसके बावजूद देश की एक बड़ी आबादी कच्चे घरों, झुग्गियों और फुटपाथ पर रहने को मजबूर है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में समृद्धि के साथ ही झुग्गी-बस्ती में रहने को मजबूर लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।


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