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इस चुनाव में खुली जीप की मांग ज्यादा

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Thursday, March 27, 2014-2:09 PM

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने गाडिय़ों के काफिले पर रोक लगा दी है। यही वजह है कि नेताओं की पहली पंसद खुली जीप बन गई है। हर दल के नेता खुली जीप में ही प्रचार करना अधिक पंसद कर रहे हैं। नेताओं की मानें तो खुली जीप में उन्हें काफी आसानी होती है। राजधानी में लोग घरों से निकलना कम ही पसंद करते हैं, लेकिन जब नेता का काफिला इलाके में पहुंचता है तो वह अपने घरों की छतों पर या फिर बालकनी में आ जाते हैं।

इसका फायदा पूरी तरह से नेता उठाते हैं। नेता वोटरों से हाथ जोड़कर वोट देने की अपील करते हैं, तो मतदाता भी उन्हें हाथ हिलाकर या फिर 2 अंगुलियों से जीत का चिन्ह बनाकर वोट देने का आश्वासन देते हैं। साथ ही समर्थकों की भीड़ होती है, जो नीचे ग्राऊंड फ्लोर पर रहने वाले मतदाताओं से वोट देने की अपील करते हैं।

खर्च कम फायदा ज्यादा

एक दौर था जब उम्मीदवार इलाके में अपने पक्ष में वोट मांगने के लिए आते थे तो गाडिय़ों का काफिला उनके साथ होता था। कई बार तो ऐसा होता था कि उनके काफिले में 10-20 गाडिय़ां होती थी, जिससे एक ओर आम जनता को परेशानियों से दो चार होना पड़ता था वहीं, दूसरे उम्मीदवारों की शिकायत भी रहती थी कि चुनाव प्रचार में मजबूत पार्टियां धन-बल का इस्तेमाल कर चुनाव जीतती हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार के दौरान खर्च की जाने वाली रकम को निर्धारित कर दिया है। इस कारण आज हर उम्मीदवार को खुली जीप ही पंसद आ रही है।

अलग- अलग डिजाइन

गाडिय़ों का कारोबार करने वाले व्यापारी मुकुल बताते हैं कि डिमांड पर भी खुली जीप तैयार की जा रही हैं। खासतौर से अलग-अलग पार्टियां अपने हिसाब से गाड़ी का रंग बताती हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन के लिए किराए पर साधारण खुली जीप करीब 10 हजार रुपए में मिल रही है। जबकि खरीदने पर इसकी कीमत 2 से 3 लाख रुपए है।

इसलिए पहली पसंद

चुनाव आयोग ने चुनावी खर्चा 70 लाख रुपए निर्धारित किए हैं। इससे उम्मीदवार जीप खरीदने के बजाय उसे किराए पर लेना ही पसंद कर रहे हैं। खुली जीप किराए पर देने वाले कारोबारी रमेश खन्ना की मानें तो राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार खुली गाड़ी किराए पर लेते हैं। चुनाव आयोग ने जब से खर्चा निर्धारित कर दिया है, तब से वे भी किराए पर ही गाड़ी लेना पंसद कर रहे हैं। निर्दलीय या क्षेत्रीय पार्टियों की बात करें तो इनके उम्मीदवार किराए पर ही जीप को लेना चाहते हैं।  दिल्ली-एनसीआर से भी उम्मीदवार खुली जीप की मांग करते हैं।


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