महाराष्ट्र : मुस्लिमों को ‘आप’ का विकल्प

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Friday, March 28, 2014-2:13 AM

नई दिल्ली: आमतौर पर माना जाता है कि मुस्लिम वोट सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं लेकिन यह भी सच है कि चुनावों के बाद उनके मुद्दों को उठाने के लिए कोई पार्टी आगे नहीं आती। महाराष्ट्र के मुस्लिमों की बात करें तो सवाल उठता है कि वे इस बार भी कांग्रेस और राकांपा गठबंधन को चुनेंगे या बदलाव का रास्ता अपनाएंगे। इस बार उनके सामने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ आम आदमी पार्टी का विकल्प भी है। राज्य में कुल वोट का 14 फीसदी मुस्लिम वोट है और वे कई संसदीय क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका में मौजूद हैं।

कांग्रेस ने पैदा किया मोदी का डर : भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन चलाने वाली एक्टिविस्ट डॉ. नूरजहां सफिया नियाज के मुताबिक, इस बार मुस्लिम नए विकल्प के बारे में सोच रहे हैं। अगर हम कोई फैसला नहीं लेते तो कांग्रेस और राकांपा गठबंधन हमें हल्के में ही लेते रहेंगे। मुस्लिमों को 8 साल बाद भी राज्य में सच्चर कमेटी की सिफारिशों का फायदा नहीं मिला है। दिल्ली के चुनावों से पहले तक मेरे सामने विकल्प नहीं था लेकिन अब मैंने तय किया है कि आम आदमी पार्टी को मौका देना चाहिए। मोदी के सवाल पर वह कहती हैं कि मोदी एक हकीकत है, हमें इसे स्वीकारना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि हमें कांग्रेस के पैदा किए हुए मोदी भय से पार पाने की कोशिश करनी चाहिए।

भाजपा-कांग्रेस एक सिक्के के दो पहलू : वरिष्ठ पत्रकार शोएब का मानना है कि महाराष्ट्र में भाजपा और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने हमारे समुदाय और देश की तरक्की के लिए कुछ नहीं किया है जबकि भगवा पार्टी का एकमात्र मकसद नफरत फैलाना और देश की प्रगति में रुकावटें पैदा करना है। ऐसे हालात में  मुस्लिमों को धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को वोट देना चाहिए। मैं आम आदमी पार्टी को वोट देने के विकल्प के बारे में सोच रहा हूं।

भाजपा को हराने के लिए पार्टी नहीं प्रत्याशी को वोट : एजुकेशन रिसर्च सेंटर, मरकज उल कासमी के डायरेक्टर और एक्टिविस्ट मौलाना बुरहानुद्दीन कासमी के मुताबिक, हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि भाजपा को हराने के लिए हमें किसी पार्टी को नहीं बल्कि प्रत्याशियों को वोट करना चाहिए, चाहे वह आम आदमी पार्टी को हो, कांग्रेस या फिर एनसीपी का। कासमी इसके लिए सामुदायिक बैठकें कर रहे हैं। दिल्ली में 70 में से केवल 8 सीटों पर दर्ज करने के बावजूद मुस्लिम बाहुल्य 5 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इसलिए यह नहीं कह सकते कि महाराष्ट्र में कांग्रेस को मुस्लिम वोट नहीं मिलेंगे लेकिन दिल्ली की तरह यहां भी आम आदमी पार्टी पहली बार उनके लिए विकल्प के तौर पर मौजूद है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद समाजवादी पार्टी की छवि को राज्य में गहरा झटका लगा है। तमाम लोगों का तो यहां तक कहना है कि राज्य में सपा की हालत तो कांग्रेस से भी बदतर है।


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