कई सरकारें बदलती देखीं, पर नहीं बदले हालात

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Tuesday, April 08, 2014-12:44 PM
नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): उम्र 103 साल, आखों पर चश्मा, लडख़ड़ाती आवाज लेकिन वोटिंग के लिए आज भी जज्बा युवाओं जैसा। यह कहानी है मदनगीर आई-2/73 निवासी रामवती की। वर्ष 1911 में जन्मी रामवती ने होश संभालने से लेकर अब तक हुए चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाई है। इस बार हो रहे लोकसभा चुनाव में भी रामवती 10 अप्रैल का इंतजार कर रही है।
 
उन्हें तारीख तो याद नहीं रहती लेकिन गली मौहल्ले में हो रहे प्रचार और घर पर वोट मांगने वालों को देखकर वे परिजनों से चुनाव के बारे में पूछती रहती हैं। देश की आजादी से लेकर अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों में रामवती ने लोकतंत्र में विश्वास किया है। इस बार भी वे चुनाव में वोटिंग का इंतजार कर रही हैं। आखों से धुंधला दिखाई देने तथा प्रत्याशियों को पहचानने में रामवती से भले ही भूल हो जाए लेकिन वे किसे वोट देना है यह कभी नहीं भूलतीं। 
 
रामवती बताती हैं कि वोट डालने के लिए उन्हें परिजनों का सहारा लेना पड़ता है। बूथ पर भी चुनाव अधिकारी के अतिरिक्त मौजूद परिजनों से पूरी जानकारी लेकर ही वे अपना वोट डालती हैं। प्रत्याशी कौन है उन्हें यह तो याद नहीं रहता लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बारे में पूरी जानकारी है। आम आदमी पार्टी को लेकर आए दिन हो रही चर्चाओं से उन्हें आप के बारे में पता है लेकिन वोट किसे देंगी, इसके बारे में वो कुछ नहीं बताती हैं। रामवती के परिवार में 3 बेटे-बहुएं, 5 पोते हैं। 

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