अदालत का पिता के हत्यारे पुत्र को राहत देने से इंकार

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Tuesday, April 08, 2014-5:42 PM

नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने घर के अंदर शराब पीने पर ऐतराज करने वाले अपने पिता पर बर्बरतापूर्वक हमला करने और उनकी गला दबाकर हत्या करने के दोषी पुत्र की सात साल की सजा बरकरार रखी है।

 न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने दोषी रोहित को राहत देने से इंकार करते हुए कहा कि वह किसी राहत का हकदार नहीं है क्योंकि उसने अपने बुजुर्ग पिता की देखरेख करने के बजाय उसने उन्हें गंभीर चोटें दीं और उनकी गला दबाकर हत्या कर दी।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता रोहित को अपने बुजुर्ग पिता की देखरेख करनी चाहिए थी लेकिन उसने धारदार हथियार से उन्हें गंभीर चोट पहुंचायीं और फिर उनकी गला दबाकर हत्या कर दी।

पीड़ित की एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने घर के अंदर उसके रोहित और उनके मित्र के शराब पीने पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता कोई राहत का हकदार नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को अतार्किक या ज्यादा नहीं कहा जा सकता। निचली अदालत ने रोहित को गैरइरादतन हत्या का दोषी पाते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 फरवरी 2011 की शाम को रोहित अपने दोस्त के साथ करोलबाग स्थित घर में शराब पी रहा था, तभी पीड़ित ने वहां आकर उनके शराब पीने का विरोध किया था।

 


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