शापिंग मॉल वेस्टगेट में एक सिख ने दिखाया हौंसला

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Tuesday, September 24, 2013-11:33 AM

नैरोबी: केन्या के शापिंग मॉल वेस्टगेट में शनिवार को जब हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, उस समय एक सिख युवक सतपाल सिंह भी वहां मौजूद था। सतपाल ने न सिर्फ कई लोगों को सुरक्षित मॉल से बाहर निकाला, बल्कि वह युवक फिर मॉल में घुसा और कई घायल लोगों को भी बाहर निकाल ले आया।

पूरी घटना का बयान करते हुए सतपाल सिंह ने न्यूज पोर्टल बीबीसी डॉट कॉम को बताया, मैं मॉल में एक बिजनेस मीटिंग के लिए गया था। हमले के समय हम जावा कॉफी हाउस के पास सीढ़ियों पर थे। वहां कार पार्किंग में पास बच्चे कुकिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे। करीब 12.25 बजे हमने गोलियों की आवाज सुनी और मॉल के मुख्य प्रवेश द्वार पर चिल्लाने का शोर सुना, जिसे देखने के लिए मैं उस ओर गया।

सतपाल ने कहा, 'डर के मारे लोग इधर-उधर भाग रहे थे चारों ओर गोलियों की आवाज और लोग फर्श पर गिर रहे थे। कुछ करने की हालत बहुत ही खराब थे। लोग बस उस जगह से भाग रहे थे। मैं सीढ़ियों से नीचे उतर पहली मंजिल पर पहुंचा। मैं एक पिलर के पास एक सशस्त्र पुलिस अधिकारी के पास पहुंचा और उसे कहा कि वह नीचे जाए और देख कि क्या हालात हैं और बताए कि हम क्या कर सकते हैं।'

हमलावर का पहचान

सतपाल ने कहा कि एक आदमी मुंह के बल फर्श पर और एक अन्य व्यक्ति सीढिय़ों पर खून से सना पड़ा था। जैसे ही मैं मदद के लिए आगे बढ़ा, मैंने सीढ़ियों से हमलावर को अपनी ओर आते देखा और उसने मुझपर दो फायर किए। वह सफेद कमीज पहने हुए था, उसके दांए कंधे पर एक बड़ा बैग लटका हुआ था, और मैंने उसका चेहरा देख लिया क्योंकि उसने नकाब नहीं पहना था। उसने संवाददाता को आगे बताया, 'मैं नहीं जानता कि उसका निशाना कैसे चूक गया। उसके पास एक बड़ी गन थी।'

मेरा मानना है कि उसके पास अवश्य ही एके-47 थी। वे हर किसी को और उनके रास्ते में आने वाले हर व्यक्ति को गोली मार रहे हैं, या फिर जो लोग फर्श पर गिरे हुए हैं, वे उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। जब उसने मुझ पर पहली गोली चलाई, मैं तेजी से नीचे झुक गया। उसने दूसरा फायर किया। मैं उससे भी बच गया और तेजी से पहली मंजिल की ओर भागा ताकि वहां पुलिस अधिकारी को इस गोली चलाने वाली की जानकारी दे सकूं।

मैं जब पहली मंजिल पर पहुंचा, वहां पुलिस अधिकारी नहीं था। तब मैं ऊपरी मंजिल पर पहुंचा और वहां सुरक्षा गार्ड मौजूद सभी लोगों को सिनेमा हाल में धकेला और शटर गिरा देने को कहा। जब गोलियों की आवाज करीब आई तो सब को वहां धकेला गया जहां टिकट बिकते है। हमने देखा दो लोग ऊपर आए और उन्होंने चारों ओर फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ने अपने सिर पर साफे बांध रखे थे।

हम उनके चेहरे पूरी तरह नहीं देख सके, लेकिन हमने देखा कि उन्होंने बैग भी उठाए हुए थे। इधर, हालांकि शटर गिरा हुआ था, खिड़कियां शीशे की थीं। हमने सिनेमा के कर्मचारियों से पूछा कि क्या वहां कोई आपातकालीन रास्ते के बारे में पूछा। तब कर्मचारी हमें मूवी थियेटर में ले गए जहां आपातकालीन रास्ता था।

कैसे बचे

आपातकालीन रास्ते से बाहर आने के बाद, हम टैरेस पर पहुंचे और हमने निर्माण सामग्री की मदद से दरवाजा बंद कर दिया वहां एक गैस वेल्डिंग मशीन, गैस सिलेंडर और ईंटे पड़ी थीं, जिन्हें हमने दरवाजा मजबूती से बंद करने के लिए इस्तेमाल किया। टैरेस पर 40 से अधिक लोग थे। एक पुलिस कर्मचारी भी था जिसने पेंट पहन रखी और कमीज उतार दी थी। शायद ऐसा उसने ऐसा इस लिए किया होगा ताकि आतंकवादी उसे पहचान न सकें, हालांकि वह एके-47 लिए हुए था।

सतपाल ने बताया, हमारे साथ एक गर्भवती महिला और कुछ बच्चे भी थे। उस समय हमारे साथ कई और लोग भी थे। लगभग 45 मिनट के बाद, हमने ऊपर से ही कार पार्किंग एरिया में देखा जहां कुछ देर पहले बच्चे कुकिंग शो में हिस्सा ले रहे थे, वहां बच्चे जमीन पर लहुलुहान होकर गिरे हुए थे और हमने लोगों को गोलियों की बौछार से बचाकर जावा कॉफी हाउस के आपातकालीन रास्ते की ओर बढ़ते देखा।

तब हम भी टैरेस से जावा कॉफी हाउस की ओर भागें और हम सीढिय़ां उतरने लगे। यह रास्ता बेसमेंट की ओर जाता है। तभी हमने गोलियों और चिल्लाने की आवाज सुनी और जैसे ही हम बेसमेंट में पहुंचे, हमने लोगों को खुले रहे गेट से बाहर तेजी से धकेलना शुरू किया। उसने आगे बताया, हमने सभी को बाहर निकाल दिया, पुलिसकर्मी जोकि हमारे साथ था, बेसमेंट में यह देखने के लिए लौटा कि वहां कोई है तो नहीं। तभी उसकी टांगों में गोलियां लगीं और उसके हाथ से गन छूट गई। तब हम उसे बाहर खींचकर लाए।

घायलों की रक्षा

सतपाल ने बताया, 'मैं एक रिटायर्ड ब्रिटिश जवान से मिला जिसने बताया कि टॉप फ्लोर पर कुछ लोग फंसे हुए हैं और वह वहीं आ रहा है।' उसने बताया कि उसने चार लोगों की आंखों को छूकर देखा, वे मर चुके थे। लेकिन कुछ अन्य लोग घायल हालत में हैं और उन्हें मदद की जरुरत है। उस पुलिसवाले के पास हथियार थे और उसने बुलेटप्रूफ पहनी हुई थी। इसलिए हमने उसे अपने साथ टॉप फ्लोर पर चलने को कहा ताकि लोगों को नीचे लाया जा सके।

परन्तु उसने हमारी कोई मदद नहीं की, तो हमने फैसला किया कि हम खुद दोबारा ऊपर जाएंगे। हमने वहां से घायल लोगों अपने कंधों पर उठाया और आपातकालीन रास्ते से उन्हें नीचे लाए। हमने घायल महिलाओं और बच्चों को वहां से बचाया। मेरे दिमाग में उस समय यही चल रहा था कि लोगों को बचाना है और अपने कीनियाई साथियों की  बचाने की हरसंभव प्रयास करना है।


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