पंजाब में हाल-ए-'आप'

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Tuesday, December 31, 2013-10:35 AM

जालंधर: (नीरज बाली) पंजाब के सभी जिलों में जिस आम आदमी पार्टी का अभी तक गठन भी नहीं हुआ वह पार्टी पंजाब में विस्तार की बड़ी-बड़ी डींगें हांक रही है। नेतागिरी के नाम पर पंजाब इकाई के कन्वीनर को छोड़ किसी को यह तक नहीं पता की आम आदमी पार्टी पंजाब इकाई का गठन कब हुआ।

पंजाब कमेटी की अगर बात करें तो सदस्य तरणदीप सिंह कहते हैं मेरे कोल न कोई बैठा सिगा, एक मिनट बाद करलो कोई आया होया आ। जबकि इकाई के सचिव एस. के हांडा कहते हैं जरा रुकिए एक मिनट बाद देख कर फोन करता हूं मैंने कहीं लिखा हुआ है कमेटी के एक अन्य सदस्य शिव कौड़ा का कहना है ब्रॉदर नॉट शिऑर, नियर अबाउट पंज छह महीने हो गए होने आ पार्टी की महिला कमेटी सदस्य कुलदीप कौर से जब बात हुई तो उन्होंने कहा ऐनु डेढ़ दो साल हो ही गए आ जी इतना कह कर इन्होने अपना फोन किसी और को पकड़ा दिया और कहा आ लो जी गल करो. पार्टी के सूबा प्रवक्ता नवीन जैरथ ने कहा आलमोस्ट एक साल पहलां जदो आम आदमी पार्टी बनी सी उस तो महीने दो महीने बाद ही। जब उनसे तारीख पूछी गई तो उन्होंने कहा मैनु जो लग रिहा है ट्वेंटी फॉर और फिफथ ऑफ़ दिसंबर 2012।

जो पार्टी लोगो के मुद्दे उठाने की बात कर रही है उसी पार्टी के सूबा कैशियर रणजीत सिंह को पंद्रहा बार फोन किया लेकिन उन्होंने एक बार भी फोन नहीं उठाया। भूख हड़ताल पर बैठे जिन साथियों को छोड़, आप के यह नेता अरविन्द केजरीवाल के शपथ समारोह में जा घुसे फिलहाल उस पार्टी के नेतायों का गरूर सातवें आसमान पर है। नवीन कहते हैं कि ‘वागदे दरिया च’ सब नाल आ जांदे ने।

जाहिर है यह अरविन्द केजरीवाल का ही जादू है जो आम आदमी पार्टी पंजाब इकाई के सर चढ़ कर बोल रहा है। लेकिन पंजाब में जमीनी हकीकत इससे कोसों परे है। बेशक दिल्ली की तरह आप के नेता पंजाब में राजनीतिक जमीन तलाशने की फिराक में है लेकिन उसके लिए अभिमान के साथ-साथ पंजाब में एक केजरीवाल का होना भी जरुरी है। लेकिन कन्वीनर हरजोत सिंह बैंस का कहना है कि हमें पंजाब में किसी नेता कि जरुरत नहीं है जनता ही नेता है। पंजाब इकाई में आप के कुल सात सदस्य हैं. जिनमें एक-आद को छोड़ बाकियों का राजनीति से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं। रटा-रटाया इनका ब्यान कि आम आदमी ही हमारा नेता है सवाल खड़ा करता है कि आम आदमी तो पहले से ही पंजाब में रह रहा है और क्रांति के नाम पर आम आदमी और आम आदमी पार्टी की हलचल लगभग शून्य है, तो आम आदमी पार्टी की फिर जरुरत क्या है?

आप से पहले मनप्रीत बादल की पीपीपी, कामरेड और बसपा जैसी बड़ी पार्टीयां पंजाब में अपनी किस्मत आज़मा चुकी हैं यहां तक की कई संघर्ष कमेटियां अपने संघर्ष से कई मुद्दों पर सरकार को नहीं झुका सकी. हां अगर पंजाब में कोई के जरीवाल खड़ा हो जाए तो दिल्ली वाली लगभग स्थिति यहां भी बन सकती है लेकिन उसके लिए लोहे के चने चबाने जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा। आम-आदमी आम-आदमी का रट्टा चलने वाला नहीं। पंजाब में आप के स्व्यंभू नेता दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने की खबर के बाद जालंधर में मिठाई बांटने वाले पंजाब इकाई के कार्यकर्तायों के अपने पास पार्टी की तरफ से अधिकारिक तौर पर लिखित कोई चिट्ठी तक नहीं है इसके विपरीत वह पंजाब में 10-10 रूपए लेकर मेंबरशिप अभियान चला रहे है जिसमें यह तक नहीं देखा जा रहा है कि कौन व्यक्ति कि स पृष्ठ भूमि का है यानि कोई भी अपराधिक छवि का व्यक्ति आम आदमी पार्टी को दस रुपए देकर सदस्यता ले सकता है? इस पर इनके कार्यकर्तायों का कहना है कि हम लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या उन पर कोई मुक़दमा तो नहीं दर्ज।

इस तरह से आ सकती है पंजाब में आप की लहर। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक पंजाब के लोगों की मुश्किलों को जानना उन्हें समझना और हल करने की पहल करना. दिल्ली की तरह लोगों से जुडऩे की मुहीम, व्यक्ति गत और सोशल साइट्स पर। जनता की जायज़ मांगों के लिए सरकार के खिलाफ बगावत। भृष्टाचार के इलावा नशा पंजाब का मुद्दा है इस पर आप को अति गंभीरता से आंदोलन करने की आवश्यकता है. पंजाब में जनता को तंग करने वाले सरकार के नागुजार फरमान, पंजाब पुलिस के रोज चर्चा में आते रवैये, सिहत सुविधायों में अभाव के खिलाफ आप को अपनी आवाज़ काफी बुलंद करनी पड़ेगी, सिफऱ् सपने दिखा या आम-आदमी आम-आदमी का रट्टा और डींगें हांकने से जनता साथ नहीं जुडऩे वाली।


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