जो आता है यहां तन्हा वो बस तन्हा ही जाता है

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Monday, January 06, 2014-10:02 AM

साहित्य सेवा में मील का पत्थर साबित हो रही केसरी साहित्य संगम की माह दिसम्बर की नशिस्त (मिनी मुशायरा) पी.एच.एफ. लीजिंग हाल में पद्मश्री विजय कुमार चोपड़ा की सरपरस्ती एवं अमृतसर से मुख्यातिथि के तौर पर आए पद्मश्री डा. दलजीत सिंह की अध्यक्षता में संयोजक वीरेन्द्र शर्मा योगी व श्री शिव दयाल चुघ द्वारा शमा रोशन से हुई। श्री योगी ने कहा कि केसरी साहित्य संगम के इस मजबूत प्लेटफार्म द्वारा हम उर्दू, हिंदी और पंजाबी अदब की सेवा करते हुए उस्ताद शायरों के साथ-साथ नौजवान शायरों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।

मुख्य मेहमान डा. दलजीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि शायर व कवि समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। नशिस्त के लिए दो तरही मिसरे उर्दू व पंजाबी के दिए गए थे। उर्दू के मिसरे थे :

हजूमे कशमकश में आदमी घबरा ही जाता है। नादान सही इतना भी नादान नहीं है।
जिन शायरों ने तरही कलाम पड़ा उनमें से कुछ शे’र हैं-

हरबंस सिंह अक्स
दिलेरी खत्म हो जाए पसीना आ ही जाता है
जो पुतला मोम का है धूप से घबरा ही जाता है

साहिल जालन्धरी

ये माना के तेरे जैसे बहुत हैं जमाने में
मगर आना तेरा आंगन मेरा महका ही जाता है

विशाल काफिर

मैं तेरे शहर से गुजरा नहीं करता इसी डर से
दयारे हुस्न में ईमान धोखा खा ही जाता है।

संदीप छिब्बर
ईमान धर्म प्यार जो चाहो खरीदो यहां
किस चीज की सजी यहां दुकान नहीं है

वीरेन्द्र शर्मा योगी
जो मर मिटे अपने वतन की शान के लिए
उससे तो कोई बेहतर इंसान नहीं है

सुमेश दिलबर
बड़ा बेरहम अफसर है बड़ा ही लालची है वो

बहाने बाज भी है काम को लटका ही जाता है-
कालिया कौसर जालन्धर
तालुक सारे दुनिया तक ही हैं महदूद ऐ कौसर
जो आता है यहां तन्हा वो बस तन्हा ही जाता है।

विशेषातिथि इकबाल सिंहअरनेजा तथा यशपाल सिंह धीमान ने इस अवसर पर कहा कि केसरी साहित्य संगम 15 जनवरी को अमर शहीद लाला जगत नारायण जी की याद में राष्ट्रीय स्तर का मुशायरा आयोजित करने जा रहा है जिसकी तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। 14 जनवरी को होने वाले मिनी मुशायरा के लिए उर्दू के दो मिसरे तय किए गए :

शजर पे एक ही पत्ता दिखाई देता है
मिट भी जाएंगे तो हम एक दास्तां हो जाएंगे।

                                                                                                                                                    प्रस्तुति : एस.एस. हसन

 


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