ऑपरेशन ब्लूस्टार के खिलाफ मैंने संसद सदस्यता छोड़ी, बादल ने क्या किया: अमरिंदर

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Sunday, February 16, 2014-6:24 PM

जालंधर: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन ब्लूस्टार के मुद्दे पर 1984 से उनका स्टैंड स्पष्ट है तथा उन्हें इस मामले में अपनी भूमिका को लेकर अकालियों से सर्टीफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आज एक बयान में कहा कि ऑपरेशन ब्लूस्टार का उन्होंने उस समय भी विरोध किया था, अब भी विरोध करते हैं तथा भविष्य में भी करेंगे परन्तु मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सदैव अपना स्टैंड परिवर्तित किया है तथा आगे भी करते रहेंगे।

उन्होंने अकाली नेताओं सुखदेव सिंह ढींडसा तथा बलविन्द्र सिंह भूंदड़ द्वारा अमरेन्द्र पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ऑपरेशन ब्लूस्टार करने की सलाह देने के लगाए अरोपों पर बोलते हुए कहा कि पूरा विश्व जानता है कि उन्होंने ऑपरेशन ब्लूस्टार के खिलाफ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था तथा उन्होंने अपनी संसद सदस्यता भी छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि पंजाब में 1980 से जनवरी 1983 तक हुई घटनाओं को लेकर वह बातचीत में शामिल थे परन्तु बाद में इससे पीछे हट गए।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बादल से सवाल किया कि वह लोगों को बताए कि 28 मार्च 1984 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी.वी. नरसिम्हाराव के साथ बैठक में क्या बातचीत हुई थी। क्या उन्होंने (बादल) दरबार साहिब पर सैनिक कार्रवाई की सिफारिश नहीं की थी क्योंकि बादल को जरनैल सिंह भिंडरावाले के उभरने से खतरा महसूस हो रहा था। उन्होंने कहा कि अब बादल डर कर क्यों भाग रहे हैं। ऑपरेशन ब्लूस्टार के समय तो वह छिप कर बैठ गए थे तथा एक सप्ताह बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किाय था।

बादल पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ तो बादल ने भिंडरावाले के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की सिफारिश की तो दूसरी ओर वह खालिस्तान कमांडो फोर्स जिसका नेतृत्व गुरजंट सिंह राजस्थानी कर रहा था, के संरक्षण के लिए यत्नशील रहे। उन्होंने बादल से पूछा कि क्या उन्होंने पुलिस ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादियों के भोगों में भाग नहीं लिया। क्या उन्होंने पंजाब में मारे गए निर्दोष 37 हजार लोगों की हत्याओं के खिलाफ एक शब्द भी बोला।

इन निर्दोष लोगों में अधिकांश हिंदू थे। क्या अपने निर्दोंष हिंदुओं की हत्या की निंदा की। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बादल अधिक समय तक इतिहास की सच्चाई को छुपा कर नहीं रख सकेंगे। एक दिन तो सच्चाई सामने आएगी ही। उन्होंने कहा कि ढींडसा व भूंदड़ को आगे करके बादल कुछ हासिल नहीं कर सकते। अगर हिम्मत है तो वह स्वयं आगे आकर उनका सामना करे।

उन्होंने कहा कि 30 वर्ष पहले हुई घटना को लेकर बादल ने चुनावों के निकट राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिशें की हैं परन्तु अब जनता जानती चाहती है कि बादल व भारत सरकार के बीच हुई बैठकों में क्या घटित हुआ था।


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