बुद्धि के बल पर आम लड़की भी बन सकती है महारानी

  • बुद्धि के बल पर आम लड़की भी बन सकती है महारानी
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Saturday, September 24, 2016-2:57 PM

चित्तौड़ के महाराणा लक्ष्मण सिंह के सबसे बड़े कुमार अरि सिंह जी शिकार के लिए निकले थे। एक जंगली सूअर के पीछे अपने साथियों के साथ घोड़ा दौड़ाते वह चले जा रहे थे। सूअर इन लोगों के भय से बाजरे के एक खेत में घुस गया। उस खेत की रक्षा एक बालिका कर रही थी। वह मचान में उतरी और खेत के बाहर आकर घोड़ों के सामने खड़ी हो गई। बड़ी नम्रता से उसने कहा, ‘‘राजकुमार! आप लोग मेरे खेत में घोड़ों को ले जाएंगे तो मेरी खेती नष्ट हो जाएगी। आप यहां रुकें, मैं सूअर को मार कर ला देती हूं।’’


राजकुमार को लगा कि यह लड़की खाली हाथ भला सूअर को कैसे मार सकेगी। कौतूहलवश खड़े हो गए पर उन्हें यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि उस लड़की ने बाजरे के एक पेड़ को उखाड़कर तेज किया और खेत में निर्भय घुस गई। थोड़ी ही देर में उसने सूअर को मारकर राजकुमार के सामने लाकर रख दिया। 


वहां से राजकुमार अपने पड़ाव पर आए। जब वे लोग स्नान कर रहे थे तब वह पत्थर आकर उनके एक घोड़े के पैर में लगा, जिससे घोड़े का एक पैर टूट गया। वह पत्थर उसी किसान की लड़की ने अपने मचान पर से पक्षियों को उड़ाने के लिए फैंका था। राजकुमार के घोड़े की दशा देख कर वह अपने खेत से दौड़कर वहां आई और असावधानी से पत्थर फैंका गया, इसके लिए क्षमा मांगने लगी।


राजकुमार बोले, ‘‘तुम्हारी शक्ति देखकर मैं आश्चर्य में पड़ गया हूं। मुझे दुख है कि तुम्हें देने योग्य कोई पुरस्कार इस समय मेरे पास नहीं है।’’


उस लड़की ने कहा, ‘‘अपनी गरीब प्रजा पर आप कृपा रखें, यही मेरे लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है।’’


इतना कह कर उस समय वह चली गई। सायंकाल राजकुमार तथा उनके साथी घोड़ों पर बैठे जा रहे थे। तब उन्होंने देखा कि वही लड़की सिर पर दूध की मटकी रखे दोनों हाथों से दो भैंसों की रस्सियां पकड़े जा रही है। राजकुमार के एक साथी ने विनोद करने के लिए धक्का देकर उसकी मटकी गिरा देनी चाही, पर जैसे ही उसने घोड़ा बढ़ाया, उस लड़की ने उसका इरादा समझ लिया। उसने अपने हाथ में पकड़ी भैंस की रस्सी को इस प्रकार फैंका कि उस रस्सी में उस सवार के घोड़े का पैर उलझ गया। घोड़े के साथ ही वह सवार भी धड़ाम से भूमि पर गिर पड़ा।  इस निर्भय बालिका के साहस और शक्ति को देख कर कुमार अरि सिंह मुग्ध हो गए। अरि सिंह ने उसके पिता के पास जाकर उसके विवाह की इच्छा प्रकट की। वह बालिका एक दिन चित्तौड़ की महारानी हुई। प्रसिद्ध राणा हमीर ने उसी के गर्भ से जन्म लिया था।


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