Edited By ,Updated: 12 Sep, 2026 03:13 AM

हालांकि अतीत में पंचायतों (खाप) द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों के लिए इन्हें ‘कंगारू अदालतें’ भी कहा जाने लगा था तथा कुछ तालिबानी किस्म के फैसलों के लिए अतीत में पंचायतों (खाप) की आलोचना भी हुई है परन्तु अब बदलते माहौल में ये तेजी से बदल रही हैं और अनेक...
हालांकि अतीत में पंचायतों (खाप) द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों के लिए इन्हें ‘कंगारू अदालतें’ भी कहा जाने लगा था तथा कुछ तालिबानी किस्म के फैसलों के लिए अतीत में पंचायतों (खाप) की आलोचना भी हुई है परन्तु अब बदलते माहौल में ये तेजी से बदल रही हैं और अनेक सामाजिक कुरीतियां दूर करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले रही हैं। 25 जुलाई, 2026 को हरियाणा के ‘चौबीसी चबूतरे’ पर ‘चौबीसी सर्व पंचायत (खाप)’ के प्रधान सुभाष गोयल (नम्बरदार) की अध्यक्षता में आयोजित महापंचायत में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई पंचायतों (खापों) के प्रतिनिधियों ने समाज में व्याप्त कुरीतियां दूर करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
महापंचायत में सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता, फूहड़ता, नशों के सेवन और गन कल्चर को बढ़ावा देने वालों के सामाजिक बहिष्कार का आह्वान करते हुए कहा गया कि ये समाज के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। निर्णय लिया गया कि नशा करने और बेचने वालों के विरुद्ध पंचायतें अपने स्तर पर कार्रवाई की सिफारिश करेंगी। इनके साथ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। नशा तस्करी की सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी और ‘खापें’ उसे सम्मानित करेंगी। विवाहों और अन्य सामाजिक आयोजनों में कलाकारों द्वारा अश्लील गीत गाने और उन पर डांस करने पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया। समारोहों में अश्लील गीतों पर डांस करवाने या इस तरह के कलाकारों को बुलाने वालों पर भी सामाजिक स्तर पर कार्रवाई करने का फैसला करने के अलावा सरकार से अश्लील गीत बनाने, गाने और उन पर डांस करने वाले कलाकारों के विरुद्ध सख्त कानून बनाने की मांग भी की गर्ई। महापंचायत में पहुंचे दर्जनों हरियाणवी लोक कलाकारों/गायकों ने ‘गन कल्चर’ व गीतों में अश्लील शब्दों का प्रयोग नहीं करने का संकल्प लिया।
इसी प्रकार 7 सितम्बर को ‘पलवल’ के गांव ‘मंडकोला’ में ‘36 बिरादरी’ और ‘52 पाल’ की ‘महापंचायत’ में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों को सादगीपूर्ण बनाने के लिए 22 महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। महापंचायत में एन.सी.आर. क्षेत्र से लगभग 10,000 लोगों ने इसमें भाग लिया। एक रिपोर्ट में ‘52 पाल’ के अध्यक्ष ‘अरुण जैलदार’ के हवाले से बताया गया है कि दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए अब सगाई की रस्म में लड़के को केवल एक रुपया, पांच कपड़े और एक किलो मिठाई दी जाएगी और सगाई में अधिकतम 5 लोग ही शामिल होंगे। वहीं शादियों में बारात का आकार सीमित करते हुए अधिकतम 51 बारातियों को ही अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। विवाह समारोह में केवल शाकाहारी और सात्विक भोजन परोसने की अपील भी की गई है।
विवाहों में 2 तोले से अधिक सोना और 100 ग्राम से अधिक चांदी देने पर रोक रहेगी। कन्यादान की राशि भी अधिकतम 11,000 रुपए तय की गई है। लग्जरी वाहन, नकद राशि और महंगे उपहार देने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। शादी समारोहों में डी.जे. और शराब के उपयोग पर भी पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। मृत्यु भोज पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। महापंचायत का मानना है कि इन फैसलों से सामाजिक आयोजनों में बढ़ता आॢथक बोझ घटाने और सादगी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी तथा उक्त क्रांतिकारी निर्णयों के लिए संबंधित पंचायतें (खाप) प्रशंसा की पात्र हैं।
भारत गांवों का देश है और देश की बहुसंख्या गांवों में ही बसती है, ऐसे में यदि उक्त बुराइयों को समाप्त करने और विवाहों में सादगी बारे पंचायतों (खाप) के उक्त निर्णयों का देश की अन्य सभी पंचायतें भी समर्थन करने लगें तो वह दिन दूर नहीं जब समाज को इन कुरीतियों से काफी हद तक मुक्ति मिल सकेगी। नशों, गन कल्चर, गीतों में अश्लीलता, दहेज आदि कुप्रथाओं से मुक्ति मिलने से लोगों का जीवन आसान बन सकेगा और वे अपने धन एवं ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल कर सकेंगे।—विजय कुमार