श्रीलंका में ईस्टर बम अटैक पर ऐतिहासिक फैसला, 15 दोषियों को 200 से 260 साल तक की कठोर सजा

Edited By Updated: 23 Sep, 2026 11:59 AM

sri lanka 15 men jailed for life in 2019 easter bombings

श्रीलंका की अदालत ने 2019 ईस्टर संडे आत्मघाती हमलों के मामले में 24 में से 15 आरोपियों को दोषी ठहराया। उन्हें 200 से 260 साल तक कठोर कारावास की सजा मिली। नौ आरोपी बरी हुए। मुकदमे में 23,270 आरोप और 2,309 गवाह थे। दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी...

Colombo: श्रीलंका की एक कोर्ट ने 2019 के ईस्टर फिदायीन हमला मामले में बीते मंगलवार को सजा का ऐलान कर दिया। अदालत ने 24 आरोपियों में से 15 को दोषी ठहराया और हर दोषी को 200 साल से ज्यादा के कारावास की सजा सुना दी। बता दें कि ISIS से जुड़े लोकल इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (NTJ) से जुड़े 9 फिदायीन हमलावरों ने 21 अप्रैल, 2019 को 3 कैथोलिक चर्च और 3 आलीशान होटलों को टारगेट बनाकर सिलसिलेवार तरीके से धमाके किए थे। इन अटैक्स में 11 भारतीयों सहित 270 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

 

'अदादेराना' समाचार पोर्टल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो हाईकोर्ट की एक बेंच ने सभी 15 दोषियों के लिए 220-220 साल के सश्रम कारावास की सजा का ऐलान किया है। जस्टिस नवरत्ने मारासिंघे, जस्टिस रामनाथन कन्नन और जस्टिस सुजीवा निसांका की 3 सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाते हुए 15 आरोपियों को दोषी करार पाया, जबकि 9 अन्य को बरी कर दिया। गौरतलब है कि इस मामले की करीब 5 साल तक सुनवाई चली और उसके बाद अदालत ने मुख्य आरोपी नौफर मौलवी को भी दोषी ठहराया। आरोपियों के विरुद्ध 23 हजार 270 आरोप तय किए गए थे, जबकि अभियोजन पक्ष की तरफ से 2 हजार 309 गवाहों ने बयान दर्ज कराए गए।

 

जान लें कि इस मामले के आरोपियों पर आतंकवाद रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत हत्या और हत्या की कोशिश, आतंकवादी गतिविधियों की साजिश, हथियार व विस्फोटक रखने और उनके प्रयोग से जुड़े आरोप लगाए गए थे। बता दें कि नेशनल तौहीद जमात के नेता जाहरान हाशिम ने खुद फिदायीन दस्ते का नेतृत्व किया था, जिसने ईस्टर संडे की प्रेयर को निशाना बनाया था। इस अटैक के बाद श्रीलंका में सियासी विवाद खड़ा हो गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और पीएम रानिल विक्रमसिंघे पर पहले से खुफिया जानकारी मौजूद होने के बावजूद अटैक्स को रोकने में नाकामयाब होने के आरोप लगे थे। जांच के दौरान, धमाकों के मामले के 5 संदिग्धों को यूएई से भी वतन वापस लाया गया था।
 

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