जम्मू-कश्मीर के देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त कर्मचारियों की बर्खास्तगी सही परंतु देर से

Edited By , Updated: 13 Jul, 2021 05:59 AM

dismissal of employees involved in anti national activities of j k is right

इस वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर सरकार ने देश विरोधी तथा अलगाववादी गतिविधियों में शामिल तत्वों को शह देने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्रमाण जुटाने के लिए 5

इस वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर सरकार ने देश विरोधी तथा अलगाववादी गतिविधियों में शामिल तत्वों को शह देने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्रमाण जुटाने के लिए 5 सदस्यीय ‘विशेष टास्क फोर्स’ का गठन करके उसे अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी को सौंपने का आदेश दिया था ताकि वे नौकरी से निकाले जा सकें। 

प्रदेश सरकार ने यह कमेटी ऐसी पक्की जानकारी मिलने के बाद कायम की थी कि ज मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद इसके हितों को क्षति पहुंचाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। बताया जाता है कि ज मू-कश्मीर में सी.आई.डी. ने ऐसे 500 के लगभग अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनाई है। इसी के अनुसार देशविरोधी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सलाहुद्दीन के 2 बेटों सहित 9 अन्यों को उनकी नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 

इनमें से 4 अनंतनाग, 3 बडग़ाम, 1-1 बारामूला, श्रीनगर, पुलवामा और कुपवाड़ा से हैं जो जम्मू-कश्मीर पुलिस, शिक्षा, कृषि, कौशल विकास, बिजली और स्वास्थ्य विभागों से संबंध रखते हैं। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में निम्र शामिल हैं: 

* सलाहुद्दीन के बेटे सईद अहमद शकील और शाहिद युसूफ, जिन पर आतंकवादियों को फंडिंग करने का आरोप है। इनमें से एक शेर-ए-कश्मीर इंस्टीच्यूट आफ मैडीकल साइंसिज में व दूसरा शिक्षा विभाग में था।
* आतंकियों को सुरक्षाबलों की गतिविïिधयों की जानकारी और पनाह देने वाला लश्कर-ए-तोयबा का सहयोगी आई.टी.आई. कुपवाड़ा का चपरासी।
* अपने घर में हिजबुल मुजाहिदीन के 2 कु यात आतंकवादियों को पनाह देने वाला स्वास्थ्य विभाग का चपरासी नाज मोह मद अल्लाई।
* जमात-ए-इस्लामी व दु तरान-ए-मिल्लत का समर्थन करने सहित देश विरोधी गतिविधियों में शामिल अनंतनाग जिले के शिक्षा विभाग के 2 टीचर। 

* जमात-ए- इस्लामी से जुड़े शिक्षा विभाग के 2 कर्मचारी जब्बार अहमद पर्रे तथा निसार अहमद तांत्रेे।
* जम्मू-कश्मीर पुलिस के 2 कांस्टेबल भी बर्खास्त किए गए हैं। इनमें से एक अब्दुल राशिद शिगन जो स्वयं सुरक्षा बलों पर हमले में शामिल था तथा अगस्त 2012 में गिर तारी के समय वह बांदीपुरा के तत्कालीन वरिष्ठï पुलिस अधीक्षक बी.ए. खान के घर पर सुरक्षा में तैनात था। 

* बिजली विभाग का इंस्पैक्टर शाहीन अहमद लोन, जिसे हिजबुल मुजहिदीन के लिए हथियारों की तस्करी में शामिल पाया गया।
उक्त सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों में से 4 पहले ही गिर तार किए जा चुके हैं। सलाहुद्दीन का एक बेटा अक्तूबर 2019 में और दूसरा बेटा मार्च 2019 में गिर तार किया गया था जबकि अनंतनाग और कुपवाड़ा से संबंधित 2 कर्मचारी नव बर 2020 में गिर तार किए गए थे। बर्खास्त किए गए 7 अन्यों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई जारी है। 

उक्त अधिकारी और कर्मचारी 1990 से 1993 के बीच प्रदेश सरकार की नौकरी में आए अर्थात उन्हें नौकरी करते हुए 28 से 30 वर्ष तक हो चुके थे। भारी बेरोजगारी के दौर में सरकारी नौकरी पाकर देश का आभार मानने की बजाय देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होकर ये न जाने अपने ही कितने लोगों को मरवा चुके होंगे। अत: जहां इन देश विरोधी तत्वों का पता लगा कर इन्हें बर्खास्त करवाने वाले अधिकारी बधाई के पात्र हैं वहीं इतने ल बे समय तक इनका पता न लगा सकने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। 

इन बर्खास्तगियों के बाद इसी वर्ष अप्रैल से अब तक राष्ट्रविरोधी व आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के चलते सरकारी नौकरी से निकाले गए अधिकारियों और कर्मचारियों की सं या 17 हो गई है।प्रशासन की इस कार्रवाई से पूर्व मु यमंत्री महबूबा मुफ्ती भड़क उठी हैं और उन्होंने इसे ‘आपराधिक कृत्य’ व घाटी के लोगों को एक सजा बताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘छद्म राष्ट्रवाद’ के नाम पर जम्मू-कश्मीर के लोगों का शोषण करने का आरोप लगाया है। ऐसे बयान देने वाले नेता आखिर किसके साथ हमदर्दी जता रहे हैं? उन लोगों के साथ, जो अपने ही लोगों की हत्या करवाने और उनके परिवारों को तबाह व बर्बाद करने के जिम्मेदार हैं?—विजय कुमार 

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