Edited By ,Updated: 19 Aug, 2026 03:53 AM

पिछले कुछ समय से देश में अग्निकांडों में वृद्धि होने से जान-माल की भारी क्षति हो रही है। न सिर्फ आम लोग ही इन अग्निकांडों का शिकार हो रहे हैं बल्कि सरकारी कार्यालय, अस्पताल, होटल और नाइट क्लब आदि भी आग की चपेट में आ रहे हैं जिनकी चंद घटनाएं निम्न...
पिछले कुछ समय से देश में अग्निकांडों में वृद्धि होने से जान-माल की भारी क्षति हो रही है। न सिर्फ आम लोग ही इन अग्निकांडों का शिकार हो रहे हैं बल्कि सरकारी कार्यालय, अस्पताल, होटल और नाइट क्लब आदि भी आग की चपेट में आ रहे हैं जिनकी चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 25 अप्रैल, 2024 को ‘पटना’ (बिहार) स्थित एक होटल में लगी भीषण आग के परिणामस्वरूप 3 महिलाओं सहित 6 मेहमानों की मौत हो गई तथा 15 अन्य बुरी तरह झुलस गए।
* 10 अक्तूबर, 2024 को ‘लुधियाना’ में एक गैस्ट हाऊस में आग लग जाने के कारण वहां ठहरे एक दम्पति की दम घुटने से मौत हो गई।
* 6 दिसम्बर, 2025 को ‘अरपोरा’ (गोवा) में स्थित एक नाइट क्लब में भीषण आग लगने के परिणामस्वरूप वहां गीत, संगीत और नृत्य का आनंद ले रहे 25 लोगों की मौत हो गई तथा 50 से अधिक लोग घायल हो गए। शुरुआती जांच में पता चला कि क्लब में आग से बचाव सम्बन्धी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
* 18 दिसम्बर, 2025 को ‘बहरोड़’ (राजस्थान) जिले के ‘नीमराणा’ में स्थित एक गैस्ट हाऊस में आग लग जाने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई तथा 5 अन्य बुरी तरह झुलस गए।
* 18 मई, 2026 को ‘प्रयागराज’ (उत्तर प्रदेश) स्थित एक चार मंजिला होटल में आग लग गई जिससे वहां ठहरे अनेक मेहमान झुलस गए।
* 3 जून, 2026 को ‘दिल्ली’ में मालवीय नगर के ‘हौज रानी’ इलाके में स्थित एक होटल में सुबह-सवेरे भीषण आग लग गई। आग इमारत के निचले हिस्से से शुरू हुई और तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। इस दुर्घटना में वहां ठहरे हुए 23 लोगों की मौत हो गर्ई जबकि 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। जांच में होटल में सुरक्षा सम्बन्धी कई खामियां सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार होटल के पास फायर एन.ओ.सी. नहीं था तथा 6 कमरों के लिए लाइसैंस होने के बावजूद वहां लगभग 20 कमरे बना लिए गए थे। होटल में दाखिल होने और बाहर निकलने के लिए एक ही मार्ग होने तथा अन्य सुरक्षा सम्बन्धी कमियों ने दुर्घटना को और गंभीर बना दिया।
* और अब 17 अगस्त, 2026 को ‘बीरभूम’ (पश्चिम बंगाल) के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ‘तारापीठ’ में तड़के साढ़ेे 4 बजे जब एक चार मंजिला होटल में ठहरे हुए अधिïकांश लोग सो रहे थे, अचानक ग्राऊंड फ्लोर पर रिसैप्शन के निकट किसी बिजली उपकरण से निकली चिंगारी से भीषण आग भड़क उठी। इसके परिणामस्वरूप वहां ठहरे 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 34 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मृतकों में मेघालय के ‘वैस्ट गारो हिल्स’ से आए एक परिवार के 2 नाबालिगों सहित 5 सदस्य भी शामिल थेे जो तारापीठ में एक धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए आए हुए थे। हालांकि होटल में एमरजैंसी की हालत में बाहर निकलने का रास्ता था लेकिन उस पर ताला लगा हुआ था।
होटल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के बाद हमेशा की तरह प्रशासन ने ‘तारापीठ’ में स्थित सभी होटलों, लॉज, गैस्ट हाऊसों तथा ‘होम स्टे’ में बिजली की व्यवस्था तथा फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच का आदेश दे दिया है। अधिकांश मामलों में शार्ट सर्किट होने और आग से बचाव सम्बन्धी नियमों का पालन न करने, बड़े प्रतिष्ठïानों में अनिवार्य एन.ओ.सी. या सुरक्षा सम्बन्धी ऑडिट न होने आदि कारणों से ही अग्निकांड होते हैं। अत: जब तक संबंधित स्टाफ को पूरे प्रशिक्षण व अत्याधुनिक अग्निशमन उपकरणों से लैस करके इनका मुकाबला करने की रणनीति नहीं बनाई जाती तब तक ऐसे अग्निकांडों व उनके कारण होने वाली मौतों को नहीं रोका जा सकता।—विजय कुमार