Edited By ,Updated: 24 Feb, 2026 03:59 AM

हाल ही में हुई इंडिया ए.आई. इम्पैक्ट समिट में आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस और इस बढ़ते क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय नियमों की जरूरत पर फोकस किया गया। समिट का मकसद यह पता लगाना है कि ए.आई. सभी को कैसे फायदा पहुंचा सकता है। पिछले एक दशक में, खासकर पिछले 5...
भारत ने पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए एक समझौता साइन किया है, जो अमरीका के नेतृत्व वाला एक ग्रुप है जो जरूरी मिनेरल्स और आॢटफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) के लिए एक मजबूत आपूर्ति चेन बनाने पर फोकस करता है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह अलायंस देश की सैमीकंडक्टर इंडस्ट्री को विकसित करने के लिए जरूरी है। इस बीच, ए.आई. समिट में अमरीकी डैलीगेशन के प्रमुख ने कहा, ‘‘हम ए.आई. के ग्लोबल गवर्नैंस को पूरी तरह से खारिज करते हैं। हमारा मानना है कि ए.आई. को अपनाने से बेहतर भविष्य नहीं मिल सकता अगर यह ब्यूरोक्रेसी और सैंट्रलाइज्ड कंट्रोल के अधीन है।’’ समिट भारत में निवेश लाई, अडानी ग्रुप और अंबानी ने 1-1 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है और माइक्रोसॉफ्ट ने 50 बिलियन रुपए के निवेश की। इस शिखर सम्मेलन में इमैनुएल मैक्रों, लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा और एंटोनियो गुटारेस जैसे नेताओं सहित 45 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को एक साथ लाया गया। एक मजबूत अमरीकी प्रतिनिधिमंडल और माइक्रोसॉफ्ट, आई.बी.एम. और एडोब जैसी कंपनियों के अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व पर जोर देते हैं।
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनी क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख लोग, जिनमें ज्यादातर 30 वर्ष से कम आयु के थे, शामिल हुए। प्रौद्योगिकी मंत्री वैष्णव शिखर सम्मेलन को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि भारत का ए.आई. निवेश 140 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है।जैसे-जैसे ए.आई. स्वास्थ्य सेवा से लेकर मनोरंजन तक दैनिक जीवन में अधिक एकीकृत हो रहा है, नियामक निरीक्षण की आवश्यकता बढ़ रही है। जबकि ए.आई. बढ़ी हुई दक्षता और बेहतर निर्णय लेने जैसे लाभ प्रदान करता है, यह महत्वपूर्ण जोखिम भी पैदा करता है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता होती है। ए.आई. तकनीक क्या है और दुनिया क्यों चिंतित है? चिंता का कारण है, क्योंकि यह एक दोधारी तलवार है। डर है कि ए.आई. दुनिया पर कब्जा कर लेगा। ए.आई. रोगी देखभाल और संगठनों के संसाधनों के प्रबंधन के तरीके में काफी सुधार कर सकता है। हालांकि, ए.आई. का उपयोग महत्वपूर्ण नैतिक, गोपनीयता और सुरक्षा के मुद्दे उठाता है। नौकरियों, क्रैडिट और आपराधिक न्याय प्रणाली के बारे में भी चिंताएं हैं, जहां पक्षपातपूर्ण परिणाम हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि डाटा को कैसे संभाला जाता है और इसके परिणाम क्या होते हैं।
ए.आई. नियम क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हैं। यूरोपीय संघ का प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस एक्ट ए.आई. सिस्टम को जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करता है। यह पारदर्शिता और मानव निरीक्षण सहित उच्च जोखिम वाले अनुप्रयोगों के लिए सख्त आवश्यकताएं लागू करता है। इसके विपरीत, अमरीका में एक खंडित दृष्टिकोण है, जिसमें व्यक्तिगत राज्य अपने स्वयं के नियम बना रहे हैं। ये अंतर एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता को उजागर करते हैं, क्योंकि ए.आई. में सार्वभौमिक रूप से अपनाए गए मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को स्थापित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। दिल्ली ने एक महत्वाकांक्षी, फुल-स्टैक आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस रोडमैप का अनावरण किया है, जिसका उद्देश्य देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी के अगले चरण में एक आत्मविश्वासी नेता के रूप में स्थापित करना है। इंडिया ए.आई. मिशन ने आॢटफिशियल इंटैलीजैंस पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाने के लिए 10,372 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त, 38,000 से अधिक जी.पी.यू. को एक केंद्रीकृत कम्प्यूटिंग सुविधा में एकीकृत किया गया है और 12 स्वदेशी फाऊंडेशन मॉडल वर्तमान में विकसित किए जा रहे हैं। नतीजतन, भारत ए.आई. के उभरते युग में खुद को एक डिवैल्पर और एक फैसिलिटेटर दोनों के रूप में स्थापित कर रहा है।
डी.आर.डी.ओ. की महानिदेशक डा. चंद्रिका कौशिक के अनुसार, ए.आई. अब भारत के रक्षा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नीति निर्माताओं को चिंता है कि निजी बाजारों, जैसे निजी क्रैडिट और निजी इक्विटी में पारदर्शिता की कमी, परेशानी के शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान में बाधा डाल सकती है। भारत की चुनौतियों में नवाचार और ए.आई. के सरकारी अति-विनियमन के बीच संतुलन बनाना शामिल है। यह रचनात्मकता को बाधित कर सकता है और अभूतपूर्व प्रौद्योगिकियों के विकास में बाधा डाल सकता है। साथ ही, विनियमन की कमी खतरनाक परिणाम दे सकती है। नियामक निकायों को सिविल सोसायटी संगठनों सहित ए.आई. पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों के साथ जुडऩे की आवश्यकता है। यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि नियम व्यावहारिक वास्तविकताओं पर आधारित हैं और ए.आई. प्रौद्योगिकी की तेजी से विकसित हो रही प्रकृति के अनुकूल हैं।
नैतिक ए.आई. तरीकों को बढ़ावा देने के महत्व को पहचाना जा रहा है इसमें पारदॢशता को बढ़ावा देना, उचित पहुंच सुनिश्चित करना और उपयोगकत्र्ता की गोपनीयता की रक्षा करना शामिल है। संगठनों को नैतिक दिशा-निर्देशों और फ्रेमवर्क को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो मानव कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हैं। चूंकि हम आॢटफिशियल इंटैलीजैंस की क्षमता को स्वीकार करते हैं, प्रभावी विनियमन की आवश्यकता तेजी से जरूरी हो जाती है। एक संतुलित नियामक फ्रेमवर्क हमें ए.आई. के लाभों को अधिकतम करने में मदद कर सकता है जबकि इसके जोखिमों को कम करता है। ए.आई. विनियमन का भविष्य समाज पर इस प्रौद्योगिकी के प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह मानवता की भलाई के लिए कार्य करे।-कल्याणी शंकर