Edited By Tanuja,Updated: 26 May, 2026 11:57 AM

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से दुनिया को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट दोबारा पूरी तरह खोला जा सकता है और ईरान जहाजों से टोल नहीं वसूलेगा। इससे भारत समेत कई देशों पर मंडरा रहा तेल और ऊर्जा संकट कम हो...
International Desk: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत से दुनिया को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है तो होर्मुज स्ट्रेट फिर से पहले की तरह पूरी तरह खोल दिया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला ज्यादातर तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुंचता है। भारत भी अपनी बड़ी तेल जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक समझौते के 30 दिन बाद होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया जाएगा। इसके बाद जहाज सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह बताई जा रही है कि ईरान जहाजों से किसी तरह का टोल या ट्रांजिट टैक्स नहीं वसूलेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
ईरान ने क्या कहा?
इस्माइल बघेई ने कहा कि फिलहाल बातचीत का मुख्य उद्देश्य युद्ध को रोकना है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु मुद्दे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान जहाजों पर कोई अतिरिक्त टोल लगाने की कोशिश नहीं कर रहा।
कतर में चल रही बड़ी बातचीत
समझौते को अंतिम रूप देने के लिए ईरान का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल Qatar पहुंचा है। इसमें विदेश मंत्री Abbas Araghchi समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम बढ़ाने और तनाव कम करने पर चर्चा हो रही है। बातचीत जारी रहने के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में कुछ सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला Larak Island के पास किया गया, जहां ईरानी मिसाइल साइट्स और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया गया।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
अगर होर्मुज स्ट्रेट सामान्य रूप से खुल जाता है तो भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
- तेल सप्लाई आसान होगी
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है
- व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा बढ़ेगी
- ऊर्जा संकट कम हो सकता है