हिमाचल की तरक्की में बुजुर्गों का आशीर्वाद महत्वपूर्ण

Edited By Updated: 15 May, 2022 05:47 AM

blessings of elders are important in the progress of himachal

सामाजिक सुरक्षा के आवरण को बढ़ा कर सम्मान, सेवा, सुश्रुषा, स्नेह के सरोकारों से सराबोर हिमाचल प्रदेश सरकार ने सामाजिक संबंधों की नई इबारत लिखी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने जीवन के

सामाजिक सुरक्षा के आवरण को बढ़ा कर सम्मान, सेवा, सुश्रुषा, स्नेह के सरोकारों से सराबोर हिमाचल प्रदेश सरकार ने सामाजिक संबंधों की नई इबारत लिखी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों से जो शिक्षा पाई, उसी में बुजुर्गों के संबल का रास्ता उन्होंने खुद निकाला है। 

वर्तमान हिमाचल सरकार ने कार्यभार संभालते ही वृद्धा पैंशन की आयु सीमा 80 वर्ष से घटा कर 70 वर्ष की। बुढ़ापा पैंशन की दरें 750 से बढ़ा कर 1500 रुपए प्रतिमाह की गईं, पहले 3 वर्षों में 3,90,000 से अधिक लाभार्थियों को प्रतिमाह 1500 रुपए की पैंशन की सुविधा दी जा रही थी। इसके अतिरिक्त 2021 तक ही 1,20,911 से अधिक विधवा पैंशनर्स, 64,145 से अधिक दिव्यांग पैंशनर्स, 1,482 से अधिक कुष्ठ रोगी पैंशनर्र्स और 150 ट्रांसजैंडर पैंशनर्स को पैंशन योजना से लाभान्वित किया जा रहा था। 

वर्तमान राज्य सरकार ने पैंशन योजना के बजट को 436 करोड़ से बढ़ा कर 1330 करोड़ रुपए किया है। सामाजिक सुरक्षा पैंशन के 2,22,000 नए मामले स्वीकृत किए गए हैं। अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 60 वर्ष से ऊपर सभी बुजुर्गों, जिनके परिवार में आयकर दाता नहीं है, को 1000 रुपए पैंशन स्वीकृत की है, जिससे प्रदेश में 7,78,000 परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का सहारा मिलेगा। जो मुख्यमंत्री अपने प्रदेश के 10 प्रतिशत वृद्धजनों की चिंता हर महीने करता है, उसे उनका भरपूर आशीर्वाद भी मिल रहा है। 

पहले की सरकारों में केवल 80 वर्ष से ऊपर के वृद्धजनों को पैंशन के लिए भटकना पड़ता था, पैंशन महीनों तक लटकती रहती थी। कांग्रेस के कई विधायक और कांग्रेस सरकार इसे अहसान बताती थी, लेकिन जयराम ठाकुर ने व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया। कांगड़ा जिला के शाहपुर में हुए कार्यक्रम में बटन दबाते ही प्रदेश के 7 लाख बुजुर्गों के खाते में एक साथ उनकी पैंशन आ गई। बुजुर्गों के चेहरे की खुशी उस समय देखते ही बनती थी। अब बुजुर्गों की नजर पैसे के लिए किसी के आगे नहीं झुकेगी। सरकार ने उनके संघर्ष को पहचान कर ही यह योजना समर्पित की है। 

हमें अपने अंदर झांकने की भी आवश्यकता है। हममें से बहुत कम लोग अपने माता-पिता की आर्थिक रूप से मदद कर उनका ऋण चुकाते हैं। छोटे बच्चों के घर से बाहर जाते समय घर के बुजुर्ग बच्चों को कुछ रुपए देकर उन्हें मिठाई खा लेने को कहते हैं, लेकिन बुजुर्ग सामाजिक सुरक्षा के अभाव में कहीं और देखते थे। लेकिन जयराम ठाकुर के एक कदम से पुरानी परंपरा फिर जागृत हुई है। 

बुजुर्गों और बच्चों में जो स्नेह-प्यार का गठबंधन बना है, उसके पीछे जयराम सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। जयराम ठाकुर आज खुद प्रदेश के 7 लाख बुजुर्गों का बेटा बन कर उनके सम्मान में जुट गया है। पालमपुर विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में जब मैं 71 वर्षीय श्री झौंफी राम से मिला तो मुझे इस योजना की सार्थकता का अनुभव हुआ। झौंफी राम के शब्दों में कहूं तो- ‘मैं अज फिरी जी पेया’, यानी  मुझे आज फिर जीवन मिल गया। सम्मान के साथ जीना, आॢथक स्वतंत्रता के साथ जीना इस सरकार में जयराम ठाकुर का बुजुर्गों के लिए बहुत बड़ा उपहार है। 

यह सत्य है कि जिस प्रदेश में बुजुर्ग-बच्चे खुश रहते हैं, वहां ईश्वर की कृपा भी रहती है। तभी हिमाचल पूरे देश में ‘हैप्पीनैस इंडैक्स’ में प्रथम आया है। इन प्रयासों से उत्साहित होकर  हिमाचल ने बेटियों की शादी में 31,000 का शगुन देने की योजना चलाई, सहारा योजना से गम्भीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को 3000 रुपए मासिक पैंशन लगाई गई है। चिंतपूर्णी के साथ लगते मोइन गांव का नौजवान ड्राइवर, जो सड़क दुर्घटना में अपनी रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण बिस्तर पर लेटने को मजबूर हो गया, अब उसकी धर्मपत्नी अपनी रसोई में चाय बनाते हुए जयराम ठाकुर को आशीर्वाद देते हुए कहती है कि सहारा योजना ही सहारा है तो इन योजनाओं की उपयोगिता मालूम चलती है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी और प्रदेश भर में  बिजली के बिलों में 125 यूनिट नि:शुल्क देने से, गृहिणी योजना में मुफ्त गैस के बाद सालाना 3 सिलैंडर मिलने से हिमाचल की सामान्य जनता को आर्थिक सुरक्षा तो मिली ही है, उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ी है। इससे प्रदेश की 65 प्रतिशत आबादी को सीधा लाभ मिला है। हिमाचल के कर्मचारियों को भी जयराम सरकार में प्रति माह 4000 रुपए से 25,000 रुपए की बढ़ौतरी हुई है। इससे बाजारों की रौनक बढ़ी है। व्यापार बढऩे से व्यापारी भाइयों की भी सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने का काम वर्तमान सरकार में हुआ है। 

आज पिछले साढ़े 4 वर्षों के कार्यकाल पर नजर दौड़ाएं तो कोरोना के 2 वर्षों के मुश्किल समय के बाद हिमाचल ने पिछली सभी सरकारों से ज्यादा सड़क निर्माण कर रिकॉर्ड स्थापित किया है। जल जीवन मिशन, हस्पतालों में ऑक्सीजन बैंक की बढ़ौतरी, हर जिले में डायलिसिस की शुरूआत जैसे अनेक कदम वर्तमान सरकार ने उठाए हैं, जिनकी विस्तार से चर्चा अगले लेख में करूंगा। कुल मिला कर हिमाचल में व्यापक तरक्की में जयराम सरकार का ‘हिमाचल मॉडल’ और बुजुर्गों के आशीर्वाद महत्वपूर्ण हैं।-त्रिलोक कपूर(महामंत्री भाजपा हिमाचल)

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