आजादी की अमर गाथा से ‘मजबूत पंजाब’ के संकल्प तक

Edited By Updated: 15 Aug, 2026 05:12 AM

from the immortal saga of independence to the pledge for a  strong punjab

15 अगस्त भारत के इतिहास का वह महान दिन है, जब सदियों की गुलामी के बाद भारत ने आजादी की सुबह देखी। लाखों देशवासियों के बलिदान, संघर्ष और त्याग ने भारत की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया। जब भारत ने आजादी का सूरज देखा, उस समय पंजाब की धरती ने आजादी की...

 15 अगस्त भारत के इतिहास का वह महान दिन है, जब सदियों की गुलामी के बाद भारत ने आजादी की सुबह देखी। लाखों देशवासियों के बलिदान, संघर्ष और त्याग ने भारत की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया। जब भारत ने आजादी का सूरज देखा, उस समय पंजाब की धरती ने आजादी की कीमत भी सबसे अधिक दर्द के साथ चुकाई।

1947 के देश विभाजन ने पंजाब को दो हिस्सों  में बांट दिया। यह विभाजन केवल धरती या नक्शे पर खींची गई एक लकीर नहीं थी; यह लाखों  पंजाबियों के दिलों पर भी खिंची ऐसी लकीर थी, जिसका दर्द पीढिय़ों बाद भी महसूस किया जाता है। एक ओर देश आजाद हो रहा था, तो दूसरी ओर पंजाब के लाखों परिवार अपने पैतृक घरों, जमीनों, संपत्तियों, कारोबारों और पीढिय़ों से बनाए जीवन को पीछे छोड़कर विस्थापन का शिकार हो रहे थे। उन्हें अपना सब कुछ पीछे छोडऩा पड़ा। विभाजन की हिंसा में लाखों इंसानी जानें चली गईं, लाखों लोग बेघर हुए और अनगिनत परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। आज भी पाकिस्तान में रह गए अपने पैतृक गांवों, घरों, खेतों और गुरुधामों को याद करते हुए पंजाब के बुजुर्गों की आंखें नम हो जाती हैं।

सबसे बड़ा दुख यह भी था कि पंजाबियों को अपनी धार्मिक विरासत भी पीछे छोडऩी पड़ी। गुरुद्वारे, मंदिर और उनसे जुड़ी जमीन-जायदाद, ऐतिहासिक स्थल और स्मृतियां सीमा के उस पार रह गईं। जो पंजाब अपने घर छोड़कर आया था, उसने भारत में नए घर बनाए। जो पंजाब अपनी जमीनें पीछे छोड़ आया था, उसने आजाद भारत को भरपूर अन्न से भर दिया। जो पंजाब उजड़कर आया था, उसने भारत की अर्थव्यवस्था को खड़ा करने और सीमा की रक्षा में अपना भरपूर योगदान दिया। पंजाब ने केवल विभाजन का दर्द ही नहीं सहा, बल्कि आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर भी किया। आजादी के आंदोलन में पंजाब का योगदान अद्वितीय रहा है। गदरी बाबाओं, कूका आंदोलन, अकाली आंदोलन और किसान आंदोलनों के बलिदान, लाला लाजपत राय, मदन लाल ढींगरा, शहीद करतार सिंह सराभा,  सरदार ऊधम सिंह , शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों  का क्रांतिकारी संघर्ष एवं शहादत तथा जलियांवाला बाग का नरसंहार पंजाब की आत्मा में बसे हुए हैं।

आज का दिन हमारे लिए उन लाखों आत्माओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपना वर्तमान कुर्बान करके हमारा भविष्य आजाद किया। इसी कारण 15 अगस्त का अर्थ पंजाब के लिए केवल आजादी का उत्सव नहीं है, यह बलिदान, बिछुडऩे, पुनर्वास और फिर से खड़े होने की महान गाथा भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पंजाब का भविष्य भारत के भविष्य से अलग नहीं हो सकता। भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर, अर्थात 2047 तक, एक विकसित देश बनने के लक्ष्य  ‘विकसित भारत 2047’ को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह संतोष की बात है कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था  है।  लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी  के साथ भारत विश्व में छठे स्थान पर है और क्रय शक्ति के आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली  केंद्र सरकार ने पंजाब की सीमावर्ती और रणनीतिक महत्ता को समझते हुए बुनियादी ढांचे, सड़कों, रेलवे, सीमा सुरक्षा, उद्योग, कृषि और अन्य विकासात्मक क्षेत्रों में पंजाब के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया है। देश की ऐसी उपलब्धियों और बदलाव के सामने सवाल यह है कि पंजाब की रफ्तार देश के साथ कदम क्यों नहीं मिला पा रही है? पंजाब को केंद्र  के साथ टकराव की राजनीति नहीं चाहिए। पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए, जो चंडीगढ़  से दिल्ली तक पंजाब के हक की आवाज मजबूती से उठा सके और केंद्र की योजनाओं का अधिकतम लाभ पंजाब तक पहुंचा सके।

भाजपा पंजाब और केंद्र के बीच एक विकासात्मक पुल बनने की भूमिका निभाएगी। 2027: केवल  सरकार बदलने की नहीं, दिशा बदलने की चुनावी घड़ी है जिसमें, यह फैसला होना चाहिए कि पंजाब कर्ज की ओर जाएगा या विकास की ओर?  नशे की ओर जाएगा या युवाओं के भविष्य की ओर?  पलायन की ओर जाएगा या रोजगार की ओर?  डर की ओर जाएगा या सुरक्षा की ओर? प्रचार की ओर जाएगा या परफॉर्मैंस की ओर? टकराव की ओर जाएगा या सहयोग की ओर? इसलिए 15 अगस्त 2026 को हमारा संकल्प केवल इतना नहीं होना चाहिए कि हम आजादी का उत्सव मनाएंगे बल्कि यह पंजाब की अगली पीढ़ी से यह वादा करने का समय है कि जिस पंजाब ने भारत की आजादी के लिए अपना खून दिया, वही पंजाब अब भारत की नई विकास गाथा का अग्रदूत बने। यही हमारा सपना भी है और संकल्प भी।-सरदार केवल सिंह ढिल्लों(अध्यक्ष, भाजपा पंजाब)

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