Edited By Niyati Bhandari,Updated: 14 Sep, 2026 09:35 AM

Ganesh Utsav 2026 upay: गणेशोत्सव 2026 (14 से 25 सितंबर) के दौरान तिजोरी में रखें मदार की जड़ से बने श्वेतार्क गणपति। मुद्गल पुराण के अनुसार घर से रोग, दरिद्रता और परेशानियां हमेशा के लिए दूर होंगी।
Ganesh Utsav upay 2026: गणेशोत्सव का पावन पर्व 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जा रहा है। इन 12 पावन दिनों में विघ्नहर्ता बप्पा अपने भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करने धरती पर पधारते हैं। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप इस गणेशोत्सव अपने घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होने देना चाहते, तो भगवान श्रीगणेश के सबसे चमत्कारी व प्राकृतिक स्वरूप यानी 'श्वेतार्क गणेश' को अपनी तिजोरी में स्थान दें। मुद्गल पुराण में भी इसके पूजन को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। आइए जानते हैं मदार की जड़ से बने गणपति के इस अद्वितीय स्वरूप का धार्मिक और वास्तु महत्व।
Ganesh Shwetark: श्री गणेश ही देवताओं के मूल प्रेरक हैं। श्रीगणेश ही सर्व देवगणों में अग्रणी माने जाते हैं तथा उनके पृथक-पृथक स्वरूप व नामों का उल्लेख भी धार्मिक साहित्य में मिलता है परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीगणेश जी के कुछ विशिष्ट स्वरूपों का वास्तुशास्त्र में अत्यधिक महत्व है या दूसरे शब्दों में कहें कि श्री गणपति ही स्वयं में संपूर्ण साकार वास्तु विज्ञान हैं।

Ganesh statue: श्वेतार्क गणेश जी की प्रतिमा को तिजोरी में स्थान देंगे तो धन-दौलत से भर जाएगा आपका घर-संसार। मुद्गल पुराण के अनुसार श्वेतार्क गणपति की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। श्वेतार्क गणपति के पूजन से जीवन में भौतिक सुख एवं समृद्धि का प्रवाह होता है। श्वेतार्क को मदार या आक भी कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। शिव जी को अति प्रिय हैं। इसमें गणेशजी का वास कहा जाता है। तांत्रिक क्षेत्र में विशेष माना है। इसकी जड़ शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा करके घर में रखा जाए तो विशेष हितकारी होता है।

श्वेतार्क गणेश जी बप्पा का प्राकृतिक व चमत्कारी स्वरूप है। कहते हैं जिस घर में प्रतिदिन सभी पारिवारिक सदस्य मिलकर आंकड़े के गणपति स्वरूप का पूजन करते हैं उस घर में दरिद्रता, रोग एवं परेशानियां कभी प्रवेश नहीं कर सकती।
