Edited By ,Updated: 25 Apr, 2026 05:20 AM

मार्क कार्नी निश्चित रूप से कनाडा के एक सक्षम, दूरदर्शी, गतिशील और अडिग साहसी राजनीतिक विचारधारा वाले प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हो रहे हैं। भारतीय दिवंगत प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की तरह, वह भी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के रूप में पूर्व...
मार्क कार्नी निश्चित रूप से कनाडा के एक सक्षम, दूरदर्शी, गतिशील और अडिग साहसी राजनीतिक विचारधारा वाले प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हो रहे हैं। भारतीय दिवंगत प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की तरह, वह भी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लिबरल सरकार में संकट के समय उत्तराधिकारी के रूप में आगे लाए गए थे। लेकिन दोनों में यह अंतर स्पष्ट रूप से नजर आता है कि जहां डा. मनमोहन सिंह अपने 10 साल के कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी की राजनीतिक छाया में अपनी राजनीतिक, आॢथक और प्रशासनिक प्रतिभा का खुलकर प्रदर्शन नहीं कर सके, वहीं मार्क कार्नी के स्वतंत्र, उदार और सैद्धांतिक रूप से दूरदर्शी वैचारिक अस्तित्व और हस्ती ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया है। वह अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हिटलर जैसी प्रवृत्ति और उनकी लगातार धमकियों से जरा भी नहीं डिगे, बल्कि दावोस (स्विट्जरलैंड) में 20 जनवरी, 2026 को 56वें विश्व आॢथक मंच में खंडित हुई विश्व व्यवस्था के स्थान पर नई भू-राजनीतिक व्यवस्था के आधार की आहट को उजागर करते हुए, अमरीकी महाशक्ति और तानाशाह ट्रम्प के आतंक को साहसिक चुनौती दी और पूरे विश्व को एक ऐतिहासिक झटके के साथ जागृत होने का संदेश दिया।
अल्पसंख्यक सरकार : 28 अप्रैल, 2025 को हुए 45वें संसदीय आम चुनाव में कनाडाई जनता ने उनके पक्ष में अल्पसंख्यक सरकार के गठन का जनादेश दिया था। वह 343 सदस्यों वाले हाऊस ऑफ कॉमन्स में बहुमत से केवल 3 (169) वोटों की दूरी पर थे। लेकिन जल्द ही पूरे देश में उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता, लोकप्रियता, प्रशासनिक, आॢथक और राजनीतिक क्षमता में वृद्धि हुई। उनके नेतृत्व में पूरे देश द्वारा एकजुट होकर ट्रम्प जैसे तानाशाह और अमरीकी साम्राज्य के विस्तारवाद का जवाब देने के लिए बनी सहमति के कारण, मुख्य विपक्षी दल कंजर्वेटिव और एन.डी.पी. के संसद सदस्यों ने दल बदलकर उनके नेतृत्व में एक सक्षम, स्थिर और प्रभावशाली सरकार को प्राथमिकता दी।
बहुमत : मार्क कार्नी ने भारतीय लोकतंत्र के कुछ नेताओं की तरह अपनी अल्पसंख्यक सरकार को बहुमत में बदलने के लिए न तो कोई गंदा राजनीतिक खेल खेला और न ही किसी प्रकार का भ्रष्टाचारी हथकंडा अपनाया। विपक्ष द्वारा बार-बार लाए गए अविश्वास प्रस्तावों और बजट पारित कराते समय उन्होंने बड़े धैर्य, गंभीरता और राजनीतिक कूटनीति के साथ सामना किया। हैरानी की बात यह है कि विपक्ष के भीतर कार्नी समर्थक सांसदों ने ऐसी चुनौतियों के समय कार्नी सरकार की मदद की। 5 विपक्षी पार्टियों के सांसदों के लिबरल पार्टी में शामिल होने और 13 अप्रैल, 2026 को 3 संसदीय उपचुनावों में लिबरल उम्मीदवारों की जीत के साथ, करीब एक साल बाद प्रधानमंत्री कार्नी ने संसद में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया है। इस समय 343 सदस्यीय हाऊस ऑफ कॉमन्स में लिबरल के पास 174, कंजर्वेटिव के पास 140, एन.डी.पी. के पास 6 और ग्रीन पार्टी के पास 1 सीट है।
आरोप : विपक्ष के नेता कंजर्वेटिव पियरे पोलिवरे ने संसद में बहुमत प्राप्त करने के लिए लिबरल द्वारा आंतरिक गंदे खेल को ‘कृत्रिम’ और ‘निर्मित’ करार दिया है। लेकिन राजनीति विज्ञान की विशेषज्ञ लोरी टर्नबुल का कहना है कि कानूनी, संवैधानिक और राजनीतिक तर्कसंगतता के पक्ष से देखा जाए तो यह बहुमत बिल्कुल सही है और पियरे पोलिवरे का स्टैंड गलत है। कानूनी और संवैधानिक रूप से दल-बदल के बाद संघीय कानून में उपचुनाव कराने का कोई प्रावधान नहीं है। वर्ष 2011 में दल-बदल के बाद उपचुनाव कराने के कानूनी प्रावधान के विरुद्ध खुद विपक्षी नेता पियरे पोलिवरे ने वोट दिया था, इसलिए वर्तमान कनाडाई संविधान के तहत कोई भी संसद सदस्य किसी भी पक्ष का समर्थन करने के लिए स्वतंत्र है। प्रधानमंत्री को संसद के भीतर बहुमत की आवश्यकता होती है, चाहे वह किसी भी पार्टी या सदस्यों द्वारा प्राप्त हो, संविधान पार्टी संबद्धता के बारे में बिल्कुल मौन है।
पियरे पोलिवरे भूल गए कि वर्ष 2008 में कनाडाई मतदाताओं ने स्टीफन हार्पर के नेतृत्व में अल्पसंख्यक सरकार चुनी थी। जब लिबरल, एन.डी.पी. और ब्लॉक क्यूबेक के सदस्यों ने मिलकर उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहा, तो वह संसद को निलंबित करने के लिए गवर्नर जनरल के पास चले गए। टर्नबुल का कहना है कि यह स्टीफन हार्पर का असंवैधानिक कदम था। क्या कंजर्वेटिव्स ने स्टीफन हार्पर के नेतृत्व में लिबरल पार्टी की सदस्य लियोना एलिसलेव का दल-बदल स्वीकार नहीं किया था? क्या वर्ष 2006 में वैंकूवर से निर्वाचित लिबरल सांसद डेविड इमर्सन को दल-बदल के तुरंत बाद कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया था? तब इन लिबरलों से किसी ने उपचुनाव लडऩे को नहीं कहा। ब्रिटिश कोलंबिया की लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं क्रिस्टी क्लार्क का मानना है कि यदि कोई सांसद अपने नेता या उसके निर्देशों से सहमत नहीं है, तो वह दल-बदल के लिए स्वतंत्र है। ब्रिटिश संसदीय प्रणाली में दल-बदल लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
संकटकालीन एकजुटता : मॉन्ट्रियल में 9-11 अप्रैल को लिबरल पार्टी के सम्मेलन में प्रधानमंत्री कार्नी ने खूबसूरती से कहा कि एकजुटता का अर्थ एकरूपता नहीं है। राजनीतिक या बहुमत के प्रभुत्व की तुलना में राजनीतिक भागीदारी बेहतर होती है। आज कार्नी सरकार ‘राष्ट्रीय एकजुटतावादी’ सरकार कहलाती है। अमरीकी राष्ट्रपति ने जिस तरह कनाडा के खिलाफ आॢथक, ईराक के खिलाफ सैन्य, पश्चिमी उदारवादी विचारधारा के खिलाफ और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ युद्ध शुरू किए हुए हैं, उनका मुकाबला करने के लिए देश के भीतर एक-दूसरे से लडऩे की बजाय एकजुट होकर मुकाबला करने की जरूरत है।
अब दूरदर्शी प्रधानमंत्री कार्नी ने कनाडा को अमरीका की गुलामी से मुक्त कराने का संकल्प लिया है। ‘नाफ्टा’ समझौता तोड़कर डोनाल्ड ट्रम्प ने 45वें राष्ट्रपति रहते हुए कनाडा और मैक्सिको के साथ ‘कुसमा’ समझौता किया था। पर अगले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे रद्द करके फिर से नाफ्टा बहाल किया था। इसलिए उन्होंने साफ कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति और प्रशासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अब अमरीका के साथ 75 प्रतिशत व्यापार के दिन बीत गए। नई उभरती विश्व व्यवस्था में उन्होंने यूरोपीय और एशियाई देशों, जिनमें चीन और भारत महत्वपूर्ण हैं, के साथ अपने व्यापारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने का निर्णय लिया है। (पूर्व राज्य सूचना आयुक्त पंजाब/किंग्स्टन-कनाडा)-दरबारा सिंह काहलों