Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Jul, 2026 11:12 AM
आयातित खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों और कमजोर मानसून के कारण घरेलू तिलहन उत्पादन पर मंडराते खतरे के चलते आने वाले महीनों में रसोई का बजट और बढ़ सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में महंगी खरीद, बढ़ती परिवहन लागत
बिजनेस डेस्कः आयातित खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों और कमजोर मानसून के कारण घरेलू तिलहन उत्पादन पर मंडराते खतरे के चलते आने वाले महीनों में रसोई का बजट और बढ़ सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में महंगी खरीद, बढ़ती परिवहन लागत और घरेलू उत्पादन में संभावित गिरावट के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में जल्द राहत मिलने की संभावना कम है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार, बुधवार को सरसों तेल का औसत खुदरा मूल्य 193.54 रुपए प्रति किलोग्राम, सोयाबीन तेल 163.10 रुपए प्रति किलोग्राम और पाम तेल 147.37 रुपए प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में क्रमशः 10.74 प्रतिशत, 11.53 प्रतिशत और 12.87 प्रतिशत अधिक है।
आयात लागत में तेज बढ़ोतरी
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता के अनुसार, समुद्री मालभाड़ा, बीमा प्रीमियम, रुपए की कमजोरी और तेल उत्पादक देशों द्वारा खाद्य तेल का बायोडीजल उत्पादन में बढ़ता उपयोग आयात लागत को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी आई है।
SEA के 3 जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई बंदरगाह पर कच्चे खाद्य तेलों की आयात लागत पिछले वर्ष की तुलना में बढ़कर पाम तेल के लिए 1,170 डॉलर प्रति टन, सोयाबीन तेल के लिए 1,267 डॉलर प्रति टन और सूरजमुखी तेल के लिए 1,455 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसमें क्रमशः 11 प्रतिशत, 6 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक परिस्थितियों का असर
भारत अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकता का लगभग 57 से 58 प्रतिशत आयात करता है। देश मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, यूक्रेन, रूस और अर्जेंटीना से पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल खरीदता है।
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVOPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई के अनुसार, आने वाले महीनों में खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतें इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल कार्यक्रम, अमेरिका की जैव ईंधन नीति, कच्चे तेल की कीमतों, मुद्रा विनिमय दर, मौसम और प्रमुख उत्पादक देशों की निर्यात नीतियों पर निर्भर करेंगी।
इंडोनेशिया ने 1 जुलाई 2026 से B50 बायोडीजल कार्यक्रम लागू किया है, जिसके तहत डीजल में 50 प्रतिशत पाम ऑयल आधारित बायोडीजल का मिश्रण अनिवार्य किया गया है। इससे लगभग 1.46 करोड़ टन पाम तेल बायोडीजल उत्पादन में इस्तेमाल होगा, जिससे वैश्विक बाजार में खाद्य उपयोग के लिए पाम तेल की उपलब्धता घट सकती है।
कमजोर मानसून से उत्पादन पर संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष कमजोर और असमान मानसून का असर तिलहन उत्पादन पर पड़ सकता है। खासकर सोयाबीन, मूंगफली और सरसों की फसल प्रभावित होने की आशंका है। गुजरात और मध्य प्रदेश में पिछले महीने सामान्य से कम वर्षा के कारण सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत पीछे चल रहा है।
आयात पर बढ़ेगी निर्भरता
वित्त वर्ष 2024-25 के तेल वर्ष में भारत ने 16.01 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात किया, जिसकी कुल कीमत 18.3 अरब डॉलर रही। इसमें पाम तेल की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत से अधिक रही, जबकि शेष आयात सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का था।
IVOPA का अनुमान है कि वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्य तेल आयात बढ़कर 16.8 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। इसमें 8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5.1 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल तथा लगभग 0.2 मिलियन टन अन्य खाद्य तेल शामिल होंगे।