Egg Price Hike: फीड महंगा होने से बढ़ी अंडों की कीमत, जुलाई के अंत तक घट सकते हैं दाम

Edited By Updated: 18 Jul, 2026 05:33 PM

egg price hike egg prices rise due to costlier feed

अगर आपकी डाइट में अंडा रोजाना शामिल है, तो आने वाले दिनों में इसका असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में अंडों की कीमत लगातार बढ़ रही है और खुदरा बाजार में एक अंडा 8.5 से 9 रुपए तक बिक रहा है। पोल्ट्री उद्योग का कहना है कि मुर्गियों...

बिजनेस डेस्कः अगर आपकी डाइट में अंडा रोजाना शामिल है, तो आने वाले दिनों में इसका असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में अंडों की कीमत लगातार बढ़ रही है और खुदरा बाजार में एक अंडा 8.5 से 9 रुपए तक बिक रहा है। पोल्ट्री उद्योग का कहना है कि मुर्गियों के चारे की बढ़ती लागत ने उत्पादन खर्च बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर बाजार कीमतों पर दिख रहा है।

महंगा हुआ पोल्ट्री फीड

पोल्ट्री कंपनियों के मुताबिक, मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का, सोयाबीन खली और अन्य जरूरी आयातित फीड सामग्री के दाम पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़े हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कई कच्चे माल की उपलब्धता और लागत दोनों पर असर पड़ा है।

मक्का और सोयाबीन की कीमतों में तेज उछाल

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद में अंडों की एक्स-फार्म कीमत पिछले एक महीने में करीब 15% और पिछले साल की तुलना में लगभग 40% बढ़ गई है।

उद्योग के अनुसार, मुर्गियों के चारे का करीब 55% हिस्सा मक्का होता है, जिसकी कीमत मार्च के बाद 35% से अधिक बढ़ चुकी है। वहीं, लगभग 22% हिस्सेदारी रखने वाली सोयाबीन खली 64% से ज्यादा महंगी हो गई है। इसके अलावा, फीड में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक एमिनो एसिड की कीमतें भी मार्च के बाद लगभग 3.5 गुना बढ़ चुकी हैं।

क्यों बढ़ रही है लागत?

विशेषज्ञों के मुताबिक, मक्का की मांग अब केवल पोल्ट्री सेक्टर तक सीमित नहीं है। एथेनॉल उत्पादन में बढ़ती खपत के कारण भी इसकी कीमतों में तेजी आई है। दूसरी ओर, अनियमित मानसून ने खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सोयाबीन की कीमतों पर भी पिछले साल के कमजोर उत्पादन का असर है। उद्योग का अनुमान है कि बीते वर्ष भारत में सोयाबीन उत्पादन करीब 20% कम रहा। यदि इस बार भी मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो फीड की लागत और बढ़ सकती है।

चिकन भी हुआ महंगा

तेज गर्मी का असर ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन पर भी पड़ा है। उत्पादन घटने से कई शहरों में चिकन का खुदरा भाव 250 से 260 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

पोल्ट्री उद्योग को उम्मीद है कि जुलाई के आखिर से अंडों की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। सावन के दौरान उत्तर भारत में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक कारणों से अंडा और मांस का सेवन कम कर देते हैं, जिससे मांग घट सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

हालांकि, यदि मानसून सामान्य नहीं रहा और मक्का-सोयाबीन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में अंडे और चिकन दोनों की कीमतों में फिर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
 

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