कमजोर मानसून से बढ़ी महंगाई की चिंता, टमाटर से लेकर दाल-चावल तक महंगे होने के संकेत

Edited By Updated: 10 Jul, 2026 05:22 PM

concerns over inflation rise due to weak monsoon

देश के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के बाद खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार नहीं सुधरी तो खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो

बिजनेस डेस्कः देश के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के बाद खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार नहीं सुधरी तो खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर सब्जियों, दालों और अनाज की उपलब्धता पर पड़ेगा, जिससे बाजार में कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति मानसून के आगामी चरण और फसल की प्रगति पर निर्भर करेगी।

मौसम में बदलाव का सबसे तेज प्रभाव जल्दी खराब होने वाली सब्जियों पर दिखाई देता है। टमाटर, हरी सब्जियां, मिर्च और अन्य ताजी उपज की आपूर्ति बारिश पर काफी हद तक निर्भर करती है। यदि वर्षा कम होती है तो उत्पादन घटने के साथ मंडियों में आवक भी कम हो जाती है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन पैदा होने से कीमतों में तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ सप्ताह में सब्जियों के दाम में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

दाल और चावल की कीमतों पर भी बन सकता है दबाव

कमजोर मानसून का असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं रहता। खरीफ सीजन में धान और कई प्रकार की दालों की खेती भी पर्याप्त वर्षा पर निर्भर करती है। यदि बुआई का रकबा घटता है या फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले महीनों में चावल और दाल की कीमतों पर भी दबाव बनने की आशंका है। खाद्यान्न महंगे होने से आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

मानसून की चाल पर टिकी किसानों और बाजार की नजर

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई क्षेत्रों में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। किसान भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि फसलों की बुआई समय पर पूरी हो सके। कृषि क्षेत्र में उत्पादन और बाजार में आपूर्ति का सीधा संबंध मौसम से होता है। यदि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहने पर खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

महंगाई पर पड़ सकता है व्यापक असर

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश की खुदरा महंगाई दर पर भी पड़ता है। सब्जियां, दाल और अनाज उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी कीमतें बढ़ने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे समय में सरकार और संबंधित एजेंसियां भी आपूर्ति की निगरानी तथा आवश्यक कदम उठाने पर ध्यान देती हैं।

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