कम हुई खरीफ फसलों की बुआई, दाल-चावल और खाद्य तेल की कीमतों पर बढ़ा दबाव

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 12:45 PM

kharif crop sowing declines upward pressure on prices

खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बुआई में आई कमी का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। धान, दालों और तिलहन की कम बुआई के कारण आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून की...

बिजनेस डेस्कः खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बुआई में आई कमी का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। धान, दालों और तिलहन की कम बुआई के कारण आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आम उपभोक्ता की रसोई पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

जून में चावल की महंगाई दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मई में यह 0.23 प्रतिशत थी। इसके पीछे धान की बुआई में आई गिरावट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। 10 जुलाई तक धान का रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.63 प्रतिशत कम दर्ज किया गया।

दालों पर संकट के बादल

दालों के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। तूर (अरहर), उड़द और मूंग की बुआई में क्रमशः 30.29 प्रतिशत, 29.71 प्रतिशत और 10.62 प्रतिशत की कमी आई है। इसका असर जून के महंगाई आंकड़ों में भी देखने को मिला। तूर की महंगाई दर -1.77 प्रतिशत से बढ़कर 0.85 प्रतिशत, उड़द 0.89 प्रतिशत से 2.16 प्रतिशत और मूंग 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.71 प्रतिशत हो गई। इससे आने वाले समय में दालों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

तिलहन की बुआई में भी 21.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। वहीं ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भी महंगे होने लगे हैं।

क्यों बिगड़ रहे हालात

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दालें एक मौसमी फसल हैं, इसलिए बुआई में देरी या रकबा घटने से भविष्य की आपूर्ति प्रभावित होती है। ऐसे में व्यापारी भी बेहतर कीमतों की उम्मीद में स्टॉक रोककर रखते हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति कम होती है और कीमतें बढ़ती हैं।

भारत मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है। जून में औसतन करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई। आईएमडी के मुताबिक देश के 44 प्रतिशत से अधिक जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और तेज हो सकती है।
 

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