Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 May, 2026 12:57 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तेल संकट का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) धीमी पड़ सकती है। फर्म ने अपने अनुमान को 6.7% से...
UBS Warning on India's GDP: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तेल संकट का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) धीमी पड़ सकती है। फर्म ने अपने अनुमान को 6.7% से घटाकर 6.2% कर दिया है।
दो बड़े जोखिम: ऊर्जा संकट और कमजोर मानसून
रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि रिफाइंड फ्यूल की सप्लाई और शिपिंग रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। UBS ने इसे भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए बड़ा ऊर्जा संकट बताया है।
वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के मानसून के सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया है। El Niño की 60% से अधिक संभावना ग्रामीण मांग और खाद्य महंगाई पर दबाव डाल सकती है।
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आर्थिक गतिविधियों पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत की आर्थिक गति धीमी होने लगी थी। मैन्युफैक्चरिंग और कोर सेक्टर की वृद्धि धीमी हुई। गैस की कमी के चलते उर्वरक उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि ऑटो बिक्री और बैंक लोन में कुछ मजबूती बनी रही।
तेल कीमतों पर आधारित तीन परिदृश्य
अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो FY27 में GDP ग्रोथ 6.2% रह सकती है। कीमतें 85 डॉलर तक गिरने पर विकास दर 6.5% तक पहुंच सकती है लेकिन अगर तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक जाता है, तो ग्रोथ 5–5.5% तक सीमित हो सकती है।
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घरेलू खपत पर दबाव
भारत की GDP में करीब 56% हिस्सेदारी रखने वाली घरेलू खपत पर महंगाई और कम आय का असर पड़ सकता है। शहरी क्षेत्रों में IT सेक्टर में धीमी भर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर फसल उत्पादन मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
महंगाई और ब्याज दरों का असर
UBS ने खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। ऐसे में Reserve Bank of India आगे चलकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।