Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह के मंगलवार देंगे शत्रु बाधा से मुक्ति, सांझ ढले गुप्त रूप से करें ये काम

Edited By Updated: 05 May, 2026 01:07 AM

budhwa mangal upay

Budhwa Mangal 2026 Upay: जीवन में किसी भी रुप में शत्रु बाधाओं का सामना कर रहे हैं तो बड़े मंगल के दिन सांझ ढले गुप्त रूप से करें ये काम-

Budhwa Mangal 2026 Upay: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी कलयुग के एकमात्र ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर शीघ्र अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आप जीवन में किसी भी रुप में शत्रु बाधाओं का सामना कर रहे हैं तो बड़े मंगल के दिन सांझ ढले गुप्त रूप से करें ये काम:

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कार्य सिद्धि के लिए: यदि किसी महत्वपूर्ण कार्य में अड़चन आ रही है, तो लाल स्याही से लिखी दो हनुमान चालीसा साथ लेकर घर से निकलें। एक अपने पास रखें और दूसरी रास्ते में पड़ने वाले किसी भी राम मंदिर में अर्पित कर दें। इससे बिगड़े काम बनने लगते हैं।

सुख-समृद्धि और कृपा: हनुमान जी को लाल चंदन, लाल फूल और लाल वस्त्र अर्पित करें। इसके साथ ही गेंहू के आटे और लाल गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगाने से पवनपुत्र की असीम कृपा बरसती है।

ब्रह्मचर्य और शारीरिक बल: हनुमान जी को लाल लंगोट अर्पित करने से सांसारिक संबंधों में सुधार होता है और व्यक्ति कामुकता को त्याग कर ब्रह्मचर्य व शारीरिक बल की ओर अग्रसर होता है।

शारीरिक ऊर्जा और कार्यक्षमता: बजरंगबली के चरणों से लगा सिंदूर मस्तक पर तिलक के रूप में लगाएं। यह न केवल आपकी ऊर्जा को बढ़ाता है बल्कि कार्यक्षमता में भी वृद्धि करता है।

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शत्रु बाधा से मुक्ति: शत्रुओं को परास्त करने के लिए पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा के सामने गुग्गुल (गुगल) की धूप जलाएं और इस मंत्र का जाप करें: "पूर्व कपि मुखाय पंचमुख हनुमते टं टं टं टं सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा"।

प्रेत-भूत बाधा दूर करने के लिए मंत्र: हं हनुमंते नम:
हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।

कर्ज मुक्ति के मंत्र: ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

रोगों पर विजय पाने के लिए: ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा

मंत्र विधि- नहाने के बाद हनुमान जी की पूजा सिन्दूर, गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य चढ़ाकर गुग्गल धूप व दीप जलाकर करें। लाल आसन पर बैठ कर इस मंत्र का जाप करें। उसके पश्चात हनुमान जी की आरती करना न भूलें।

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